News saga Desk
साल 2026 का पहला चंद्रग्रहण आज यानि 3 मार्च को लगने जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार यह सामान्य खगोलीय घटना नहीं, बल्कि लगभग 100 वर्षों बाद बनने वाला एक दुर्लभ संयोग है। ग्रहण को लेकर देशभर के कई मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए हैं और सूतक काल प्रभावी हो चुका है।
मान्यता है कि ग्रहण का प्रभाव प्रकृति के साथ-साथ मानव जीवन पर भी पड़ता है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
ग्रहण का समय और तिथि
यह चंद्रग्रहण दोपहर 3:20 बजे प्रारंभ होगा और शाम 6:47 बजे समाप्त होगा। हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च की शाम 5:56 बजे से शुरू होकर 3 मार्च की शाम 5:07 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा के दिन ग्रहण का योग बनने से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।
गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष सावधानी
ज्योतिषाचार्य के अनुसार ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इस दौरान सोना वर्जित माना गया है। साथ ही चाकू, कैंची, सुई जैसी धारदार वस्तुओं के प्रयोग से बचने की सलाह दी जाती है।
ग्रहण के समय घर से बाहर निकलना या इसे सीधे आंखों से देखना भी उचित नहीं माना जाता। इस अवधि में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भक्ति में मन लगाना शुभ माना जाता है।
बच्चों और बुजुर्गों के लिए निर्देश
बच्चों और बुजुर्गों को ग्रहण के दौरान खुले स्थान पर जाने से बचना चाहिए। खान-पान को लेकर भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय भोजन करना वर्जित होता है। हालांकि छोटे बच्चों, बीमार व्यक्तियों और बुजुर्गों को आवश्यकतानुसार छूट दी जा सकती है, लेकिन उन्हें सुरक्षित वातावरण में ही रखा जाना चाहिए।
खान-पान और शुद्धिकरण की परंपरा
ग्रहण शुरू होने से पहले दूध, दही, पकी सब्जी और पानी जैसे खाद्य पदार्थों में तुलसी का पत्ता या कुशा घास डालने की परंपरा है, जिससे भोजन शुद्ध बना रहे। ग्रहण काल में भगवान का स्मरण, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना लाभकारी माना जाता है। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना, घर में गंगाजल का छिड़काव करना और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
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