News Saga Desk
एंथनी अल्बनीज ने जानकारी दी है कि बुधवार सुबह करीब 9:15 बजे (AEDT) एक ‘ईरानी प्रोजेक्टाइल’ अल मिन्हाद एयर बेस के बाहर स्थित सड़क पर आकर गिरा। ABC News की रिपोर्ट के अनुसार, धमाके के बाद इलाके में भीषण आग लग गई, जिससे ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के रहने के स्थान और एक क्लीनिक को हल्का नुकसान पहुंचा।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि बेस पर तैनात 100 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई सैनिक पूरी तरह सुरक्षित हैं।
अल मिन्हाद एयर बेस क्यों है अहम?
अल मिन्हाद एयर बेस ऑस्ट्रेलिया के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से सेना लॉजिस्टिक्स, निगरानी और ट्रेनिंग से जुड़े अहम ऑपरेशन संचालित करती है। इस बेस पर केवल ऑस्ट्रेलिया ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन और अमेरिका के सैनिक भी तैनात रहते हैं।
युद्ध शुरू होने के बाद यह इस बेस पर दूसरा हमला है। इससे पहले एक ईरानी ड्रोन भी यहां गिरा था, हालांकि उस समय कोई नुकसान नहीं हुआ था।
1,700 ड्रोन और मिसाइलों से दहला यूएई
रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के पहले सप्ताह में ही यूएई पर करीब 1,700 ड्रोन और मिसाइल हमले किए गए। हालांकि, यूएई के डिफेंस सिस्टम ने इनमें से लगभग 90 प्रतिशत हमलों को हवा में ही नाकाम कर दिया।
ऑस्ट्रेलिया के शैडो डिफेंस मिनिस्टर जेम्स पैटरसन ने इस हमले को गंभीर बताते हुए कहा कि यह ईरान के रुख को दर्शाता है। उन्होंने यूएई की सहायता के लिए ‘E-7A वेजटेल’ सर्विलांस विमान भेजने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
ईरान के हमलों का अब तक का आंकड़ा
28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं।
शुरुआती 5 दिनों में 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और लगभग 2,000 ड्रोन दागे गए
कुल हमलों में 40% इजरायल और 60% अमेरिका व उसके सहयोगियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया
17 मार्च तक यूएई पर 314 मिसाइल और 1,672 ड्रोन हमले दर्ज
इन हमलों में 8 लोगों की मौत और 157 लोग घायल हुए
मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, कई देश निशाने पर
ईरान के हमलों का असर केवल यूएई तक सीमित नहीं रहा। इजरायल के तेल अवीव सहित कई शहरों को निशाना बनाया गया। ओमान के डूकम और सलालाह पोर्ट पर भी हमले हुए, जिससे तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचा।
इसके अलावा सऊदी अरब, कुवैत और कतर पर भी मिसाइलें दागी गईं, जिन्हें वहां के डिफेंस सिस्टम ने इंटरसेप्ट कर लिया। तुर्की के ऊपर से गुजर रही मिसाइलों को NATO ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
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