बेटे को लम्बी उम्र देने के लिए माँ ने देदी बेटी की बलि, तंत्र विद्या की काली सच्चाई

News Saga Desk

“कहते हैं पूत कपूत हो सकता है, लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती
लेकिन हजारीबाग की यह घटना इस कहावत को झकझोर कर रख देती है।”

रामनवमी के जुलूस के दौरान 12 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता के मामले में शुरू में दुष्कर्म और साक्ष्य मिटाने के लिए हत्या की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन एक हफ्ते बाद पुलिस जांच में ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ, जिसने सभी को स्तब्ध कर दिया इस मामले में खुद मां ही ‘कुमाता’ निकली।

विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुम्बा गांव में हुई इस निर्मम हत्या का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सामने आई सच्चाई न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में जड़ें जमा चुके अंधविश्वास के खतरनाक रूप को भी उजागर करती है।

घटना 24 मार्च की रात की है। गांव में रामनवमी का मंगल जुलूस निकाला जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बच्ची को आखिरी बार रात करीब 8 बजे जुलूस में देखा गया। इसके बाद वह अचानक लापता हो गई। परिजन पूरी रात उसकी तलाश करते रहे, लेकिन अगली सुबह करीब 8:30 बजे मिडिल स्कूल कुसुम्बा के पीछे बांसबाड़ी में बच्ची का शव बरामद हुआ। शव की हालत इतनी भयावह थी कि पूरे गांव में सनसनी फैल गई।

परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया और गंभीरता को देखते हुए तत्काल एसआईटी का गठन किया गया, जिसमें तकनीकी टीम और अनुभवी अधिकारियों को शामिल किया गया।

जांच आगे बढ़ी तो एक बेहद खौफनाक सच्चाई सामने आई। पुलिस के अनुसार, गांव की एक महिला शांति देवी उर्फ ‘भगतिनी’, जो खुद को तंत्र-मंत्र जानने वाली बताती थी उसने बच्ची की मां को यह यकीन दिलाया कि उसके बीमार बेटे को ठीक करने के लिए एक कुंवारी लड़की की बलि देनी होगी।

यही वह मोड़ था, जहां अंधविश्वास ने इंसानियत को पूरी तरह कुचल दिया। आरोप है कि मां रेशमी देवी इस बात के लिए तैयार हो गई। 24 मार्च की रात वह अपनी बेटी को लेकर भगतिनी के घर पहुंची। वहां कथित पूजा-पाठ किया गया और फिर रात करीब 9:30 बजे बच्ची को बांसबाड़ी में ले जाया गया।
पुलिस जांच के अनुसार, बच्ची को जमीन पर लिटाकर आरोपी भीम राम ने उसका गला घोंट दिया, जबकि उसकी मां ने ही उसके हाथ-पैर पकड़कर इस जघन्य अपराध में साथ दिया।

इतना ही नहीं, वारदात के बाद शव के साथ अमानवीय कृत्य किए गए। सिर पर पत्थर से वार कर शव को क्षत-विक्षत किया गया। पूरी घटना को तंत्र-साधना और अंधविश्वास के नाम पर अंजाम दिया गया।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और पूछताछ के आधार पर तीनों आरोपियों भीम राम, मां रेशमी देवी और शांति देवी उर्फ भगतिनी को गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल मामले की गहराई से जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

लेकिन यह मामला कई बड़े सवाल खड़े करता है क्या आज भी हमारा समाज अंधविश्वास की गिरफ्त में है? क्या जागरूकता की कमी ऐसी घटनाओं को जन्म दे रही है? और सबसे बड़ा सवाल क्या हम अपनी ही संतानों को इस तरह के खतरनाक विश्वासों की भेंट चढ़ने दे रहे हैं? यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि समाज के उस अंधेरे चेहरे का आईना है, जहां विज्ञान और शिक्षा के बावजूद अंधविश्वास हावी है।

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