News Saga Desk
मतगणना के दौरान पश्चिम बंगाल का सियासी माहौल उस समय और गरमा गया, जब मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई केंद्रों पर 2 से 3 राउंड की गिनती पूरी होने के बाद अचानक मतगणना रोक दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर संदेह पैदा हो रहा है।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि चुनाव आयोग की ओर से अब तक 70 से 100 सीटों के आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभी केवल 13 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी हुई है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में प्रक्रिया इससे तेज होती है।
मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी आरोप लगाए। उनके अनुसार, केंद्रीय बलों के जवान तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं के साथ सख्ती और बल प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती हैं और यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
टीएमसी नेताओं ने भी चुनावी प्रक्रिया में कथित हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मतगणना के दौरान सामने आ रही घटनाएं कई सवाल खड़े कर रही हैं।
इसी बीच राजनीतिक तनाव उस वक्त और बढ़ गया, जब कुछ भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थकों ने ममता बनर्जी के आवास के बाहर “जय श्रीराम” के नारे लगाए। इस घटना के बाद दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई।
हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आयोग को जल्द स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनी रहे।
पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के साथ सियासी आरोप-प्रत्यारोप भी अपने चरम पर पहुंच गए हैं। एक तरफ टीएमसी निष्पक्ष और पारदर्शी मतगणना की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी और संभावित हार की भूमिका बताकर खारिज कर सकती है। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया और अंतिम नतीजों पर टिकी हैं।
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