चतरा में आंधी-तूफान का कहर: पेड़ गिरे, बिजली ठप, कई घर क्षतिग्रस्त

News Saga Desk | चतरा

झारखंड के चतरा जिले के हंटरगंज प्रखंड में आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने इलाके में भारी तबाही मचा दी। अचानक बदले मौसम ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। कई जगहों पर पेड़, बिजली के पोल और घरों के करकट उड़ जाने से लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

सड़क पर गिरे पेड़, घंटों बाधित रहा आवागमन

हंटरगंज-चतरा मुख्य मार्ग पर डुमरी कॉलेज के पास आधा दर्जन से अधिक पेड़ सड़क पर गिर गए, जिससे करीब तीन से चार घंटे तक आवागमन पूरी तरह ठप रहा। सड़क पर छोटे-बड़े वाहन फंसे रहे और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में स्थानीय लोगों ने प्रयास कर किसी तरह रास्ता साफ किया, जिसके बाद आवाजाही बहाल हो सकी।

बिजली व्यवस्था ठप होने से बढ़ी परेशानी

आंधी-तूफान के दौरान कई बिजली पोल और पेड़ गिरने से इलाके में घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। बिजली नहीं रहने के कारण लोगों को पानी, रोशनी और रोजमर्रा के कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी अधिक गंभीर बनी रही।

हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल

तेज आंधी के दौरान बिजली पोल की चपेट में आने से खूंटी केवल खुर्द गांव निवासी 50 वर्षीय मो. मुमताज अंसारी गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजनों ने उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद पैर में गंभीर फ्रैक्चर के कारण उन्हें गया मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है।

घर और संपत्ति को भारी नुकसान

आंधी-तूफान के कारण कई घरों और संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ है। डुमरी गांव निवासी पिंटू सिंह का करकट का घर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वहीं ऊचला गांव के मो. जुगनू के मुर्गी फार्म का करकट गिरने से बड़ी संख्या में मुर्गियों की मौत हो गई, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। इसके अलावा शिवनाथ सिंह के बाउंड्री पर बना पुराना ब्रिज गिरने से उनका भंडार पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे करीब 50 हजार रुपये का नुकसान हुआ। अन्य कई घरों के क्षतिग्रस्त होने की भी सूचना है।

प्रशासन ने शुरू की राहत प्रक्रिया

घटना को लेकर अंचल अधिकारी ऋतिक कुमार ने बताया कि जिन लोगों को नुकसान हुआ है, वे आवेदन के साथ फोटो अंचल कार्यालय में जमा करें। इसके बाद कर्मचारी मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन करेंगे और आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा।

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