News Saga Desk
कोलकाता:भारत सरकार ने भारतीय नाविकों (Seafarers) की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 366 विदेशी जहाजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग (DG Shipping) द्वारा जारी आदेश के तहत उन जहाजों पर रोक लगाई गई है, जिन पर भारतीय नाविकों के साथ दुर्व्यवहार, वेतन भुगतान में अनियमितता, संकट की स्थिति में सहायता नहीं देने और उन्हें समुद्र में असहाय छोड़ने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
सरकार की कार्रवाई के अनुसार कुल 366 जहाजों को निगरानी सूची में रखा गया है। इनमें से 278 जहाजों को “रेस्ट्रिक्टेड” श्रेणी में रखा गया है, जबकि 88 जहाजों को पूरी तरह “ब्लैकलिस्ट” कर दिया गया है। इन जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई भर्ती तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दी गई है। परित्याग की स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किसी नाविक को विदेश के बंदरगाह पर बिना वेतन, भोजन और स्वदेश वापसी की व्यवस्था के छोड़ दिया जाता है। अंतरराष्ट्रीय परिवहन श्रमिक महासंघ के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में ही 1,125 भारतीय नाविक ऐसे हालात का शिकार बने, जिससे इस समस्या की गंभीरता उजागर हुई।
डीजी शिपिंग के अनुसार कई मामलों में जहाज संचालकों ने नाविकों को समय पर वेतन नहीं दिया, मृत्यु या लापता होने की स्थिति में परिवारों को मुआवजा देने से इनकार किया तथा संकट के समय उन्हें स्वदेश वापस भेजने की जिम्मेदारी भी नहीं निभाई। इसके अलावा कुछ जहाजों पर कार्यरत भारतीय क्रू सदस्यों ने कठिन परिस्थितियों में काम कराने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की शिकायतें भी दर्ज कराई थीं।
सरकार ने सभी भर्ती एवं प्लेसमेंट सेवा लाइसेंस (RPSL) धारक एजेंसियों को निर्देश दिया है कि वे इन जहाजों पर किसी भी भारतीय नाविक की नियुक्ति न करें। साथ ही, एजेंसियों को 14 दिनों के भीतर उन भारतीय नाविकों का पूरा विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है जो वर्तमान में इन जहाजों पर कार्यरत हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय नाविकों के हितों की रक्षा करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कंपनियों को जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित जहाज अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों और नाविक कल्याण मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं करते, तब तक उन पर लगी पाबंदियां जारी रहेंगी।
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