Nanoparticle Synthesis Machine: आईसीएआर-आईआईएबी रांची को नैनोकण संश्लेषण मशीन प्रोटोटाइप के लिए डिज़ाइन पंजीकरण मिला। इससे नैनो-उर्वरक, ग्रीन नैनोटेक्नोलॉजी और कृषि अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
Nanoparticle Synthesis Machine के क्षेत्र में झारखंड के लिए एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। आईसीएआर-भारतीय कृषि जैवप्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी), रांची को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय से एक अभिनव रिएक्शन वेसल (Reaction Vessel) के लिए डिज़ाइन पंजीकरण (Design Registration) प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि कृषि जैवप्रौद्योगिकी, नैनोप्रौद्योगिकी और स्वदेशी अनुसंधान को नई पहचान देने के साथ-साथ भविष्य में कृषि क्षेत्र के लिए उन्नत नैनो-आधारित उत्पादों के विकास का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।
भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस अभिनव डिज़ाइन को डिज़ाइन संख्या 462528-001 के अंतर्गत पंजीकृत किया है। पंजीकरण की तिथि 17 जून 2025 दर्ज है। यह मान्यता इस स्वदेशी Nanoparticle Synthesis Machine प्रोटोटाइप की नवीनता, मौलिकता और तकनीकी उपयोगिता का प्रमाण मानी जा रही है।

स्वदेशी तकनीक से तैयार हुआ आधुनिक रिएक्शन वेसल
इस अत्याधुनिक रिएक्शन वेसल का विकास आईसीएआर-आईआईएबी, रांची के वैज्ञानिक डॉ. बिप्लब सरकार के नेतृत्व में किया गया। इस परियोजना में आईसीएआर-केंद्रीय जूट एवं संबद्ध रेशा अनुसंधान संस्थान, कोलकाता तथा आईसीएआर-राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, रांची के वैज्ञानिकों ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
यह Nanoparticle Synthesis Machine पायलट स्तर पर 75 से 100 लीटर उत्पादन क्षमता से लैस है। स्टेनलेस स्टील से निर्मित इस प्रणाली में आधुनिक तापमान नियंत्रण जैकेट, स्वचालित स्टिरिंग सिस्टम तथा सीलबंद रिऐजेंट पोर्ट जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं दी गई हैं। इसकी मदद से धातु, धातु ऑक्साइड और बायोजेनिक नैनोकणों का उच्च गुणवत्ता और सटीकता के साथ पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन किया जा सकता है।
Background: कृषि अनुसंधान में क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?
पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र में नैनोप्रौद्योगिकी का महत्व लगातार बढ़ा है। कम मात्रा में अधिक प्रभावी पोषक तत्व उपलब्ध कराने वाले नैनो-उर्वरक और उन्नत कृषि उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में स्वदेशी Nanoparticle Synthesis Machine का विकास भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह तकनीक न केवल अनुसंधान संस्थानों के लिए उपयोगी होगी, बल्कि भविष्य में कृषि आधारित उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए भी नए अवसर पैदा करेगी।
Impact: किसानों और कृषि उद्योग को होगा लाभ
नई प्रणाली के माध्यम से नैनो-उर्वरक, नैनो-खनिज, नैनो-कीटनाशक तथा अन्य उन्नत नैनो-आधारित कृषि उत्पादों का कम लागत में उत्पादन संभव होगा। इससे किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक अधिक किफायती दरों पर पहुंचाई जा सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि Nanoparticle Synthesis Machine के व्यावसायिक उपयोग से कृषि उत्पादकता बढ़ाने, उर्वरकों की खपत कम करने और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। साथ ही कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास को भी नई गति मिलेगी।
Official Statement: निदेशक ने दी अनुसंधान दल को बधाई
आईसीएआर-आईआईएबी, रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने इस उपलब्धि पर अनुसंधान दल को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता कृषि और समाज के हित में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास में संस्थान की अग्रणी भूमिका को और मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि संस्थान भविष्य में भी नवाचार और स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास को प्राथमिकता देता रहेगा।
संस्थान की इंस्टीट्यूट टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट यूनिट (आईटीएमयू) बौद्धिक संपदा सृजन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण तथा उद्योग-संस्थान सहयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है।
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Public Information: उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए अवसर
आईसीएआर-आईआईएबी ने इस पंजीकृत Nanoparticle Synthesis Machine प्रोटोटाइप के सहयोगात्मक अनुसंधान, उत्पाद विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और लाइसेंसिंग के लिए उद्योगों, स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों तथा कृषि उद्यमियों को आमंत्रित किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्वदेशी तकनीक के व्यावसायीकरण से भारत में नैनोप्रौद्योगिकी आधारित कृषि उत्पादों के निर्माण को नई दिशा मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती मिलेगी।
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