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चाईबासा में प्रेसवार्ता के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा- खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिले DMFT फंड का दुरुपयोग हुआ, सरकार श्वेत पत्र जारी कर बताए राशि कहां खर्च हुई।
पश्चिमी सिंहभूम। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया है। बुधवार को चाईबासा स्थित भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा खदान प्रभावित क्षेत्रों के विकास और स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए शुरू की गई DMFT योजना का लाभ जमीन पर कहीं दिखाई नहीं देता। उनके अनुसार, राज्य सरकार और प्रशासन के संरक्षण में इस फंड की केवल बंदरबांट और लूट हुई है।
तीन दिवसीय कोल्हान दौरे के बाद उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने बताया कि उन्होंने पिछले तीन दिनों तक कोल्हान क्षेत्र का दौरा कर ग्रामीणों और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इस दौरान क्षेत्र में गरीबी, बेरोजगारी, पलायन और बुनियादी सुविधाओं की कमी की वास्तविक स्थिति सामने आई। उन्होंने कहा कि कोल्हान सहित पूरे झारखंड में विकास की रफ्तार थम गई है और इसके लिए हेमंत सोरेन सरकार पूरी तरह जिम्मेदार है।

उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि DMFT फंड के उपयोग को लेकर एक श्वेत पत्र (White Paper) जारी किया जाए, ताकि जनता को यह जानकारी मिल सके कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए मिली राशि कहां और कैसे खर्च की गई।
खदान प्रभावित क्षेत्रों तक नहीं पहुंचा DMFT का लाभ
मरांडी ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खदान प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के उद्देश्य से DMFT फंड की व्यवस्था की थी। योजना के तहत जिला उपायुक्त (डीसी) को फंड का अध्यक्ष बनाया गया, ताकि राशि का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने दावा किया कि हालिया दौरे में उन्हें कहीं भी इस योजना का अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं दिया। उनके मुताबिक, जिन गांवों को इस फंड का सबसे अधिक लाभ मिलना चाहिए था, वहां आज भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है।
चाईबासा को मिले 3,742 करोड़ रुपये, फिर भी नहीं बदली तस्वीर
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि पिछले दस वर्षों में अकेले चाईबासा जिले को DMFT मद में 3,742.15 करोड़ रुपये मिले, जिनमें से लगभग 75.68 प्रतिशत राशि खर्च भी की जा चुकी है। इसके बावजूद खदान प्रभावित गांवों में विकास नहीं हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि आर्थिक अपराध का मामला है। उनका कहना था कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद यदि लोगों के जीवन में कोई बदलाव नहीं आया तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
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पारदर्शिता पर उठाए सवाल
मरांडी ने कहा कि DMFT फंड से हुए प्रत्येक खर्च का विवरण संबंधित पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाना चाहिए था। इससे आम लोग यह देख सकते कि पैसा किस परियोजना पर और कितना खर्च हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की।
उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि वे जिला प्रशासन से खर्च का पूरा ब्यौरा मांगें और इसकी स्वतंत्र जांच करें।
खदानों की नीलामी में देरी से बढ़ा पलायन
खनन नीति पर सवाल उठाते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि देशभर में अब तक 434 खदानों की नीलामी हो चुकी है, जबकि झारखंड में केवल तीन खदानों का ही ऑक्शन हुआ है। उनका दावा था कि इन खदानों की नीलामी भी केंद्र सरकार के प्रयासों से हुई।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार समय पर खदानों की नीलामी करती तो स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता और पलायन की समस्या इतनी गंभीर नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि कई खदानें वर्षों से बंद पड़ी हैं, जिससे हजारों रोजगार समाप्त हो गए हैं।
ओडिशा मॉडल का दिया उदाहरण
मरांडी ने पड़ोसी राज्य ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 45 कोयला एवं गैर-कोयला खदानों की नीलामी से राज्य को बड़ा आर्थिक लाभ हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में झारखंड को खनिज रॉयल्टी से लगभग 22 हजार करोड़ रुपये, जबकि ओडिशा को करीब 46 हजार करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि झारखंड के पास देश के लगभग 40 प्रतिशत खनिज भंडार हैं, जबकि ओडिशा के पास केवल 17 प्रतिशत। इसके बावजूद झारखंड विकास और राजस्व के मामले में पीछे है, जो सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विदेशी दौरों और निवेश पर भी साधा निशाना
बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार के विदेशी दौरों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निवेश लाने के नाम पर कई देशों की यात्राएं और बड़े-बड़े एमओयू किए गए, लेकिन उनका कोई ठोस परिणाम जमीन पर दिखाई नहीं देता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के दावे और वास्तविकता में बड़ा अंतर है।
प्रेसवार्ता में पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, पूर्व मंत्री बड़कुंवर गगराई, भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रवक्ता जेबी तुबिद, प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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