वाराणसी के अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में 14 दिनों के अनसर काल के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन शुरू हुए। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।
News Saga Desk
काशी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन शुरू होने के साथ ही वाराणसी के अस्सी स्थित जगन्नाथ मंदिर में मंगलवार सुबह से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ज्येष्ठ पूर्णिमा पर स्नान यात्रा के बाद 14 दिनों के अनसर (विश्राम) काल के उपरांत भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए मंदिर के पट खोले गए। मंगला आरती के बाद भक्तों ने भगवान के काष्ठ विग्रह के समक्ष भोग, फल और फूल अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना की।
14 दिनों के विश्राम के बाद खुले मंदिर के पट
धार्मिक परंपरा के अनुसार स्नान यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ का विशेष जलाभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि इसके बाद भगवान प्रतीकात्मक रूप से अस्वस्थ हो जाते हैं और 14 दिनों तक विश्राम करते हैं। इसी अवधि को अनसर काल कहा जाता है।
इस वर्ष भी काशी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन शुरू होने से पहले मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और शृंगार किया गया। सुबह मंदिर का पट खुलते ही श्रद्धालुओं ने जय जगन्नाथ के उद्घोष के साथ दर्शन-पूजन किया।
पंचामृत स्नान और भव्य मंगला आरती
मंदिर के महंत राधेश्याम पांडेय ने मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की मौजूदगी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के विग्रह का पंचामृत से अभिषेक कराया। इसके बाद भगवान को श्वेत वस्त्र धारण कराए गए और फूलों की मालाओं से आकर्षक शृंगार किया गया।

सुबह 5 बजे संपन्न हुई मंगला आरती के बाद काशी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन शुरू होने के साथ श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। भगवान को सबसे पहले परवल के जूस का पथ्य भोग अर्पित किया गया।
पूरे दिन चला दर्शन-पूजन का क्रम
मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। पूर्वाह्न साढ़े 10 बजे भगवान को पंचभोग अर्पित किया गया। दोपहर 12 बजे मंदिर के पट बंद किए गए, जिन्हें पुनः दोपहर 3 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोला जाना तय है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार शाम 8 बजे संध्या आरती और रात 9 बजे शयन आरती के बाद मंदिर के पट बंद किए जाएंगे। काशी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन शुरू होने से पूरे मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला।
बुधवार को निकलेगी भगवान की डोली
मंदिर के पुजारी राधेश्याम पांडेय ने बताया कि 15 जुलाई को भगवान जगन्नाथ डोली पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे। इस धार्मिक आयोजन की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
नगर भ्रमण के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। प्रशासन और मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी की हैं।
16 जुलाई से शुरू होगा विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा मेला
काशी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन शुरू होने के बाद अब श्रद्धालुओं की नजरें विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा मेले पर टिकी हैं। 16 जुलाई से तीन दिवसीय रथयात्रा मेले का शुभारंभ होगा, जिसमें देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं।
यह रथयात्रा काशी की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में शामिल है। हर वर्ष इस आयोजन में लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथ के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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धार्मिक महत्व और श्रद्धालुओं के लिए जानकारी
भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा, अनसर काल, नगर भ्रमण और रथयात्रा की परंपरा भारतीय धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। वाराणसी का जगन्नाथ मंदिर भी इस परंपरा को वर्षों से निभाता आ रहा है।
मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से दर्शन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और निर्धारित समय का पालन करने की अपील की है। काशी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन शुरू होने के साथ आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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