राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने ‘सोहराई’ पत्रिका के पांचवें अंक का किया लोकार्पण

NEWS SAGA DESK

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने लोक भवन में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय रांची की वार्षिक पत्रिका ‘सोहराई’ के झारखंड की जनजातीय संस्कृति विशेषांक का लोकार्पण किया।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने शुक्रवार को लोक भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, रांची द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘सोहराई’ के पंचम अंक का लोकार्पण किया। इस वर्ष का विशेषांक झारखंड की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को समर्पित है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने पत्रिका के प्रकाशन की सराहना करते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, रांची के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार

जनजातीय संस्कृति को समर्पित है विशेषांक

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार द्वारा लोकार्पित ‘सोहराई’ का पांचवां अंक झारखंड की जनजातीय संस्कृति पर केंद्रित विशेषांक है। इस अंक में राज्य की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं, लोक जीवन, कला और सामाजिक मूल्यों को प्रमुखता से स्थान दिया गया है। पत्रिका का उद्देश्य झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करना और लोगों को इसकी समृद्ध विरासत से परिचित कराना है।

लोक भवन में हुआ लोकार्पण समारोह

लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पत्रिका का औपचारिक विमोचन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राज्यपाल ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, रांची की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों द्वारा सांस्कृतिक विषयों पर ऐसे प्रकाशन समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं को सम्मान देने का भी कार्य करते हैं।

क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, रांची द्वारा प्रकाशित ‘सोहराई’ एक वार्षिक पत्रिका है, जिसका उद्देश्य झारखंड की सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत को प्रोत्साहित करना है। इस वर्ष प्रकाशित पंचम अंक को विशेष रूप से राज्य की जनजातीय संस्कृति पर आधारित किया गया है। झारखंड की जनजातीय परंपराएं, लोककला और सांस्कृतिक विविधता देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती हैं।

इस पहल का महत्व

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रकाशन राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इससे स्थानीय कला, लोक संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान को व्यापक पहचान मिलती है। साथ ही युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अवसर भी मिलता है।

इस प्रकार की पहलें सरकारी संस्थानों की सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारी को भी मजबूत करती हैं तथा राज्य की सकारात्मक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने में सहायक होती हैं।

इसे भी देखें...झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026: Drone Show, AI, AR-VR और Tribal Fashion Show | Shibu Soren Tribute

लोक भवन से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, रांची द्वारा प्रकाशित वार्षिक पत्रिका ‘सोहराई’ के पंचम अंक (झारखंड की जनजातीय संस्कृति विशेषांक) का लोकार्पण किया। उन्होंने पत्रिका के सफल प्रकाशन के लिए कार्यालय के सभी पदाधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी।

सोहराई’ जैसी पत्रिकाएं झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, जनजातीय परंपराओं और लोक जीवन को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। ऐसे प्रकाशनों के माध्यम से समाज को स्थानीय संस्कृति के संरक्षण और उसके महत्व के प्रति जागरूक किया जाता है। सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने में प्रत्येक नागरिक की भागीदारी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Read More News

धनबाद के निरसा नवोदय विद्यालय में रैगिंग: 10वीं के छात्र से मारपीट के बाद अभिभावकों का हंगामा

धनबाद के निरसा नवोदय विद्यालय में रैगिंग और मारपीट के बाद अभिभावकों का प्रदर्शन, सुरक्षा पर सवाल,...

रांची में एनपीएस संचय आउटरीच कार्यक्रम आयोजित, सामाजिक सुरक्षा और पेंशन जागरूकता पर जोर

रांची में एसएलबीसी झारखंड और पीएफआरडीए ने एनपीएस संचय आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में...

Read More