Namkum Land Scam मामले में एसीबी की प्रारंभिक जांच का रास्ता साफ हो गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने चार सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट मांगी है और कैबिनेट सचिव ने जांच की अनुमति दे दी है।
News Saga Desk
रांची जिले के नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री, दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) में कथित अनियमितताओं और राजस्व अभिलेखों के गायब होने के मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। Namkum Land Scam मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इंक्वायरी-पीई) का रास्ता साफ हो गया है। राज्य के कैबिनेट सचिव ने एसीबी को प्रारंभिक जांच दर्ज करने की अनुमति दे दी है।
इस संबंध में झारखंड सरकार की ओर से गुरुवार को उच्च न्यायालय को जानकारी दी गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने एसीबी को चार सप्ताह के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
हाई कोर्ट ने मांगी चार सप्ताह में रिपोर्ट
Namkum Land Scam की सुनवाई झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई। अदालत ने कहा कि प्रारंभिक जांच में तेजी लाई जाए और चार सप्ताह के भीतर उसकी स्थिति रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष पेश की जाए।
इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तारीख निर्धारित की है। अदालत ने पहले ही संकेत दिया था कि यदि जांच की अनुमति देने में अनावश्यक देरी हुई तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।
कैबिनेट सचिव ने दी थी अनुमति
मामले की पिछली सुनवाई में उच्च न्यायालय ने कैबिनेट सचिव को एक सप्ताह के भीतर एसीबी को प्रारंभिक जांच की अनुमति देने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि यदि समय पर अनुमति नहीं दी गई तो संबंधित अधिकारियों को जवाब देना होगा।
इसके बाद राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि कैबिनेट सचिव ने मामले में पीई दर्ज करने की अनुमति दे दी है। इससे अब एसीबी के लिए जांच शुरू करने की सभी प्रशासनिक बाधाएं समाप्त हो गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
Namkum Land Scam नामकुम अंचल कार्यालय में राजस्व अभिलेखों के गायब होने और विवादित जमीन के म्यूटेशन में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता थॉमस साइमन ने उच्च न्यायालय में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि डुंडु क्षेत्र स्थित विवादित जमीन के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां की गईं।

याचिका में यह भी कहा गया कि कई बार मांग करने के बावजूद जांच के लिए जरूरी मूल राजस्व अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो गया।
अदालत ने जताई थी नाराजगी
पिछली सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया था कि अंचल कार्यालय दूसरे पक्ष के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति देने में लगातार टालमटोल कर रहा था।
जबकि उच्च न्यायालय पहले ही संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का स्पष्ट आदेश दे चुका था। इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से आदेश का पालन नहीं किए जाने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई थी।
अदालत ने माना कि सरकारी रिकॉर्ड में संभावित छेड़छाड़ और राजस्व दस्तावेजों का गायब होना अत्यंत गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
एसीबी किन बिंदुओं की करेगी जांच?
Namkum Land Scam में एसीबी प्रारंभिक जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पड़ताल करेगी। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- राजस्व अभिलेखों के गायब होने की परिस्थितियां।
- म्यूटेशन प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं।
- संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका।
- सरकारी रिकॉर्ड में संभावित छेड़छाड़।
- न्यायालय के आदेशों के पालन में हुई देरी के कारण।
जांच पूरी होने के बाद एसीबी अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में हाई कोर्ट को सौंपेगी।
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आगे क्या हो सकती है कार्रवाई?
यदि प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो एसीबी नियमित प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर आगे की आपराधिक जांच शुरू कर सकती है।
हाई कोर्ट भी एसीबी की रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और अन्य आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है। ऐसे में Namkum Land Scam आने वाले दिनों में झारखंड के सबसे चर्चित भूमि विवाद मामलों में से एक बन सकता है।
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