Bihar ED Raid: बांका के 131 करोड़ रुपये के अवैध बालू खनन मामले में ईडी ने बिहार, दिल्ली और राजस्थान के 8 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच जारी।
बिहार में Bihar ED Raid एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 131 करोड़ रुपये से अधिक के कथित अवैध बालू खनन और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बिहार, दिल्ली और राजस्थान के आठ ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि अवैध खनन से अर्जित धन के लेनदेन और उसके नेटवर्क की पड़ताल में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

महादेव एनक्लेव प्राइवेट लिमिटेड जांच के घेरे में
Bihar ED Raid के केंद्र में महादेव एनक्लेव प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। ईडी के अनुसार, कंपनी का नियंत्रण राजस्थान के श्रीगंगानगर स्थित चंदक परिवार के पास है। कंपनी का संचालन अशोक चंदक और उनके पुत्र राघव चंदक द्वारा किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
एजेंसी का आरोप है कि वर्ष 2015-16 से 2022-23 के बीच कंपनी ने बिहार के बांका जिले में बड़े पैमाने पर कथित अवैध बालू खनन किया। जांच के मुताबिक इस दौरान करीब 131 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की बालू का अवैध उत्खनन किया गया।
IIT पटना की रिपोर्ट से हुआ खुलासा
इस मामले की जांच में IIT पटना की जियोस्पेशियल विश्लेषण रिपोर्ट अहम साबित हुई। ईडी ने बांका जिले के बालू घाटों का वैज्ञानिक विश्लेषण कराया, जिसमें कथित अवैध खनन की पुष्टि होने का दावा किया गया।
रिपोर्ट मिलने के बाद ईडी ने पूरी जानकारी बिहार स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड को उपलब्ध कराई। इसके आधार पर खान एवं भूविज्ञान विभाग ने 21 अगस्त 2025 को बांका में एफआईआर दर्ज कराई। यह मामला एफआईआर संख्या 365/2025 के तहत दर्ज है और इसकी जांच अभी जारी है।

बिहार, दिल्ली और राजस्थान में एक साथ कार्रवाई
Bihar ED Raid के तहत जांच एजेंसी ने कुल आठ स्थानों पर छापेमारी की है। इनमें बिहार के बांका और पटना के अलावा दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान के श्रीगंगानगर और जयपुर स्थित ठिकाने शामिल हैं।
छापेमारी के दौरान ईडी की टीम कंपनी से जुड़े दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस, वित्तीय लेनदेन और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित अवैध खनन से अर्जित धन का उपयोग किन माध्यमों से किया गया और क्या इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के तत्व शामिल हैं।
मामले की पृष्ठभूमि
बिहार में अवैध बालू खनन लंबे समय से प्रशासन और जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ है। राज्य सरकार समय-समय पर अवैध खनन रोकने के लिए अभियान चलाती रही है, लेकिन कई जिलों से अवैध उत्खनन की शिकायतें सामने आती रही हैं।
बांका जिले का यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें वैज्ञानिक सर्वेक्षण, वित्तीय जांच और मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं को एक साथ जोड़ा गया है। इससे जांच का दायरा केवल खनन तक सीमित न रहकर वित्तीय अपराधों तक भी पहुंच गया है।
आधिकारिक बयान और जांच की स्थिति
ईडी ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई अभी जारी है और जांच के सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। फिलहाल एजेंसी की ओर से किसी गिरफ्तारी या बड़ी बरामदगी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
जांच अधिकारी कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक खातों, डिजिटल डेटा और संबंधित व्यक्तियों के बीच हुए लेनदेन की जांच कर रहे हैं। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।
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जनता के लिए महत्वपूर्ण जानकारी
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन से सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में वित्तीय जांच का उद्देश्य केवल आर्थिक अपराध का पता लगाना नहीं, बल्कि अवैध कमाई के पूरे नेटवर्क को उजागर करना भी होता है।
Bihar ED Raid से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में किन-किन लोगों या संस्थाओं की भूमिका रही है। फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और एजेंसी सभी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।
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