JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा 2025 मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC से चार सप्ताह में जवाब मांगा। मुख्य परीक्षा और पीटी विवाद पर अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।
JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य परीक्षा में शामिल कराने और प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) को रद्द करने की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 को होगी।
जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।

दो अलग-अलग याचिकाओं पर हुई सुनवाई
JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े विवाद में हाईकोर्ट के समक्ष दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं।
पहली याचिका बेबी कुमारी एवं अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर की गई है, जबकि दूसरी याचिका राजेश प्रसाद ने दाखिल की है। दोनों याचिकाओं में प्रारंभिक परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए असफल घोषित अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रारंभिक परीक्षा में कई अनियमितताएं हुई हैं।
उनका आरोप है कि JPSC द्वारा जारी मॉडल उत्तर कुंजी में कई प्रश्नों के उत्तर गलत थे, जिससे अभ्यर्थियों के अंक और परिणाम प्रभावित हुए। उनका यह भी कहना है कि उन्होंने निर्धारित कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए, फिर भी उन्हें सफल घोषित नहीं किया गया।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि आयोग ने परिणाम जारी कर दिया, लेकिन अब तक आधिकारिक कटऑफ सूची सार्वजनिक नहीं की है। इससे पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
पीटी परीक्षा रद्द करने की मांग
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की कि कथित अनियमितताओं को देखते हुए JPSC 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा रद्द की जाए।
वैकल्पिक रूप से उन्होंने यह भी मांग की कि उन्हें मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी जाए, ताकि उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
JPSC ने किया याचिकाओं का विरोध
झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत में याचिकाओं का विरोध किया।
उन्होंने अदालत को बताया कि 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े पूरे मामले की जांच चल रही है और मुख्य परीक्षा पहले ही स्थगित की जा चुकी है। ऐसे में फिलहाल कोई अंतरिम आदेश देना उचित नहीं होगा।
आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता एक तरफ प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ उसी परीक्षा के आधार पर मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति भी चाहते हैं। दोनों मांगें परस्पर विरोधाभासी हैं।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने JPSC को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर 2026 तय की गई है।
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कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को यह भी छूट दी कि यदि अगली सुनवाई से पहले कोई अत्यावश्यक स्थिति उत्पन्न होती है तो वे अर्जेंसी का उल्लेख कर पहले भी अदालत का रुख कर सकते हैं। 14वीं JPSC सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद कई अभ्यर्थियों ने मॉडल उत्तर कुंजी, कटऑफ और परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे। इसी विवाद के बीच आयोग ने मुख्य परीक्षा समेत कई परीक्षाओं को भी फिलहाल स्थगित कर दिया है।
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