झारखंड मध्याह्न भोजन योजना में फंड आवंटन की प्रक्रिया बदलेगी। 4 महीने से राशि नहीं मिलने से स्कूलों में MDM संचालन प्रभावित है, नई व्यवस्था जल्द लागू होगी।
झारखंड मध्याह्न भोजन योजना के तहत फंड आवंटन की प्रक्रिया में जल्द बड़ा बदलाव होने जा रहा है। झारखंड राज्य मध्याह्न भोजन प्राधिकरण नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत अब राशि सीधे सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाते में नहीं भेजी जाएगी। इसके बजाय स्कूलों को सामग्री खरीदने के बाद उसका वाउचर कुबेर पोर्टल पर अपलोड करना होगा, जिसके बाद संबंधित दुकानदार को सीधे भुगतान किया जाएगा। इस बदलाव का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना बताया जा रहा है।

नई व्यवस्था में कैसे होगा भुगतान?
वर्तमान व्यवस्था में झारखंड मध्याह्न भोजन योजना की राशि सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के बैंक खाते में भेजी जाती है। इसके बाद समिति के अध्यक्ष और संयोजिका संयुक्त हस्ताक्षर से राशि की निकासी करते हैं।
नई प्रणाली लागू होने के बाद स्कूल पहले मध्याह्न भोजन के लिए आवश्यक सामग्री खरीदेंगे। खरीद से जुड़े बिल और वाउचर कुबेर पोर्टल पर अपलोड किए जाएंगे। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद संबंधित दुकानदार के खाते में सीधे भुगतान किया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया डिजिटल होगी और फंड के उपयोग पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।
चार महीने से नहीं मिली कुकिंग कॉस्ट
नई व्यवस्था लागू होने की तैयारी के बीच झारखंड मध्याह्न भोजन योजना के संचालन में वित्तीय संकट भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार, स्कूलों को पिछले लगभग चार महीनों से कुकिंग कॉस्ट की राशि नहीं मिली है। अप्रैल से अब तक भुगतान नहीं होने के कारण कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन का संचालन कठिन हो गया है।
कुकिंग कॉस्ट की राशि से चावल के अलावा दाल, सब्जी, मसाले, तेल और अन्य आवश्यक खाद्य सामग्री खरीदी जाती है। राशि नहीं मिलने के कारण अधिकांश स्कूल उधार पर सामान लेकर बच्चों के लिए भोजन तैयार कर रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2026-27 का आवंटन अभी बाकी
मध्याह्न भोजन योजना केंद्र और राज्य सरकार की साझा योजना है। इसमें कुल खर्च का 60 प्रतिशत केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है।
हालांकि, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक फंड का आवंटन नहीं हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस महीने के अंत तक राशि जारी होने की संभावना है। इसके बाद स्कूलों को लंबित भुगतान मिलने की उम्मीद है।
शिक्षक संघ ने जताई चिंता
अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता नसीम अहमद ने दावा किया है कि राशि नहीं मिलने से कई स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना बंद होने की स्थिति में पहुंच गई है। उनका कहना है कि शिक्षक अपने स्तर पर या स्थानीय दुकानदारों से उधार सामान लेकर बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में मध्याह्न भोजन बाधित होता है तो इसकी जवाबदेही शिक्षकों पर तय की जाती है, जबकि समय पर राशि उपलब्ध कराना सरकार और संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है। शिक्षक संघ ने जल्द से जल्द लंबित फंड जारी करने की मांग की है।
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क्यों महत्वपूर्ण है मध्याह्न भोजन योजना?
झारखंड मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना, स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाना और कुपोषण की समस्या को कम करना है। यह योजना वर्षों से लाखों विद्यार्थियों को लाभ पहुंचा रही है और प्राथमिक शिक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है।
स्कूलों और विद्यार्थियों पर असर
राशि में देरी का सीधा असर स्कूलों के दैनिक संचालन और विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। कई विद्यालय सीमित संसाधनों के बावजूद भोजन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। यदि जल्द फंड जारी नहीं होता है, तो मध्याह्न भोजन की नियमित व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिससे बच्चों की उपस्थिति और पोषण दोनों पर असर पड़ने की आशंका है।
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