उमाशंकर सिंह को रसड़ा में गरीबों के मसीहा और जननेता के रूप में याद किया जा रहा है। तीन बार के विधायक की अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब।
News Saga Desk
बलिया। रसड़ा की राजनीति में लंबे समय तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले उमाशंकर सिंह के निधन के बाद क्षेत्र में शोक का माहौल है। तीन बार बहुजन समाज पार्टी (BSP) के विधायक रहे उमाशंकर सिंह को समर्थक और स्थानीय लोग गरीबों के मसीहा, मददगार और विकास के लिए सक्रिय जनप्रतिनिधि के रूप में याद कर रहे हैं। उनके अंतिम संस्कार और अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने उनकी लोकप्रियता और लोगों से जुड़ाव की तस्वीर सामने रखी।
गरीबों के बीच अलग थी पहचान
उमाशंकर सिंह के समर्थकों के मुताबिक उनके पास आने वाला जरूरतमंद व्यक्ति अपनी समस्या खुलकर रख सकता था। इलाज, आर्थिक परेशानी, बेटी की शादी या परिवार की दूसरी जरूरतों के लिए मदद मांगने वाले लोगों के बीच उनकी छवि एक ऐसे जनप्रतिनिधि की बनी, जो व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों की मदद करने की कोशिश करते थे।
रसड़ा और आसपास के इलाकों में उनके समर्थक आज उनके पुराने किस्से याद कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि विधायक होने के बावजूद उनका व्यवहार कई लोगों को सहज लगता था। यही वजह रही कि उनके निधन के बाद राजनीतिक समर्थकों के साथ आम ग्रामीणों में भी गहरा दुख देखने को मिला।
स्थानीय लोगों की ऐसी भावनाएं उनके अंतिम विदाई कार्यक्रम में भी दिखाई दीं। शुक्रवार को निकली अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और नम आंखों से अपने नेता को अंतिम विदाई दी।
तीन बार विधायक बनने का सफर
उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक उमाशंकर सिंह रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार निर्वाचित हुए। वह 2012 में पहली बार विधानसभा पहुंचे, 2017 में दूसरी बार और 2022 में तीसरी बार विधायक चुने गए। विधानसभा रिकॉर्ड में उनकी सदस्यता तीन बार दर्ज है।

लगातार तीन चुनाव जीतना उनके राजनीतिक प्रभाव का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने रसड़ा सीट पर जीत दर्ज की थी। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार उन्हें 87,887 वोट मिले थे और उनका वोट शेयर 43.82 प्रतिशत रहा था।
विकास कार्यों को लेकर भी चर्चा
उमाशंकर सिंह की पहचान केवल व्यक्तिगत मदद तक सीमित नहीं रही। उनके समर्थक क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों को भी उनकी राजनीतिक विरासत का हिस्सा बताते हैं।
रसड़ा क्षेत्र में संपर्क मार्गों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को लेकर उनकी सक्रियता की चर्चा लंबे समय से होती रही। समर्थकों का दावा रहा कि उन्होंने सरकार किसी भी दल की हो, अपने राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों का इस्तेमाल क्षेत्र के लिए विकास परियोजनाएं लाने में किया।
इसी वजह से उनके समर्थकों के बीच उन्हें केवल विधायक नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास से जुड़े जनप्रतिनिधि के रूप में भी याद किया जाता है। स्थानीय स्तर पर उनकी लोकप्रियता के लिए व्यक्तिगत संपर्क और विकास कार्य दोनों को महत्वपूर्ण माना जाता रहा।
जरूरतमंद परिवारों की मदद की मिसालें
उनके निधन के बाद सामने आ रही यादों में जरूरतमंद परिवारों की मदद का जिक्र भी प्रमुखता से हो रहा है। फरवरी 2026 में रसड़ा क्षेत्र में एक व्यक्ति की हत्या के बाद उसके परिवार को विधायक उमाशंकर सिंह की ओर से पांच लाख रुपये की सहायता दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। उनके भाई रमेश सिंह ने पीड़ित परिवार को यह सहायता राशि सौंपी थी।
ऐसे मामलों ने उनके समर्थकों के बीच यह धारणा मजबूत की कि संकट के समय वह आर्थिक मदद के लिए आगे आते थे। यही व्यक्तिगत जुड़ाव उनके निधन के बाद लोगों की भावनाओं में बार-बार दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विरोध से अलग बनी रही लोकप्रियता
राजनीति में विचारों और दलों को लेकर मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन उमाशंकर सिंह के निधन के बाद अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी, जबकि बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें समर्पित नेता के रूप में याद किया। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।
इससे यह संकेत मिलता है कि उनकी राजनीतिक पहचान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं थी। क्षेत्र में उनकी व्यक्तिगत पहुंच और लंबे सार्वजनिक जीवन ने उन्हें अलग पहचान दिलाई थी।
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अंतिम यात्रा में दिखा जनसमर्थन
उमाशंकर सिंह की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने उनके प्रति लोगों की भावनाओं को सामने रखा। रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में ग्रामीण, समर्थक, राजनीतिक कार्यकर्ता और विभिन्न वर्गों के लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। कई लोगों ने उनके साथ जुड़े निजी अनुभवों को याद किया।
उनकी अंतिम विदाई में मौजूद भीड़ को उनके समर्थक उनकी लोकप्रियता का प्रमाण मान रहे हैं। लोगों के बीच चर्चा रही कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में जाति और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों से संपर्क बनाए रखा।
उमाशंकर सिंह के निधन के बाद रसड़ा के सामने अब उनकी राजनीतिक और सामाजिक विरासत को आगे बढ़ाने का सवाल भी है। उनके समर्थकों के लिए यह केवल एक लोकप्रिय विधायक को खोने का दुख नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति के जाने का दर्द है, जिसके पास वे अपनी व्यक्तिगत और सामुदायिक समस्याएं लेकर पहुंचते थे।
तीन बार विधायक के रूप में उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा, जरूरतमंदों की मदद की छवि और क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर उनकी सक्रियता उनकी विरासत का हिस्सा बनी रहेगी। फिलहाल बलिया और रसड़ा के लोग उन्हें नम आंखों से याद कर रहे हैं। अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का संकेत रहा कि उमाशंकर सिंह ने अपने पीछे केवल राजनीतिक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि लोगों के साथ जुड़े रिश्तों और यादों का भी एक लंबा कारवां छोड़ा है।
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