93 लाख की ATM लूट और हत्या मामले में कर्नाटक पुलिस ने दो आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार किया है। जमशेदपुर में तलाशी के दौरान हथियार और कारतूस मिले।
जमशेदपुर: 93 लाख की ATM लूट और कैश वैन कर्मचारी की हत्या के मामले में कर्नाटक पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने करीब 20 दिनों तक गुप्त अभियान चलाने के बाद मामले के दो मुख्य आरोपियों को बिहार के वैशाली जिले से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आलोक कुमार उर्फ अंबानी और अमन सिंह के रूप में हुई है। दोनों को पकड़ने के बाद पुलिस की जांच अब इस वारदात से जुड़े पूरे आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित है।

बताया जा रहा है कि आरोपियों की तलाश के दौरान कर्नाटक पुलिस की टीम ने अपनी पहचान छिपाकर कई स्तरों पर जानकारी जुटाई। पुलिसकर्मियों ने धार्मिक तीर्थयात्रियों का भेष भी धारण किया, ताकि आरोपियों को अभियान की भनक न लगे। लंबे समय तक चली जांच के बाद दोनों आरोपियों को बिहार से गिरफ्तार किया गया।
बिहार से गिरफ्तारी के बाद जमशेदपुर पहुंची पुलिस
दोनों आरोपी बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले बताए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद मंगलवार सुबह कर्नाटक पुलिस की टीम उन्हें लेकर जमशेदपुर पहुंची। पुलिस ने सोनारी के परदेशीपाड़ा इलाके में उनके संभावित ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
तलाशी के दौरान एक बाइक की टंकी से दो जिंदा कारतूस और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। पुलिस ने आरोपियों के पास से दो पिस्तौल भी जब्त किए जाने की जानकारी दी है। बरामद सामान को जांच का हिस्सा बनाया गया है और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि हथियार और अन्य सामग्री का इस्तेमाल किस तरह किया गया।
परिवार के साथ किराये के मकान में रह रहे थे आरोपी
जांच में सामने आया कि दोनों आरोपी सोनारी के परदेशीपाड़ा इलाके में अलग-अलग किराये के मकानों में अपने परिवार के साथ रह रहे थे। पुलिस को शक है कि दोनों लंबे समय से यहां रहकर अपनी पहचान छिपाए हुए थे।
जमशेदपुर में हुई तलाशी से यह संकेत मिला है कि इस मामले की जांच अब केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं है। पुलिस अलग-अलग राज्यों में आरोपियों के ठिकानों और संपर्कों की जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों को यहां रहने में किसने मदद की और उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
93 लाख की ATM लूट मामले में कई राज्यों से जुड़ा कनेक्शन
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार दोनों आरोपी केवल कर्नाटक की इस वारदात तक सीमित नहीं हैं। उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और तेलंगाना के हैदराबाद में हुई लूट और फायरिंग की घटनाओं से भी संबंध सामने आया है।
इस जानकारी के बाद पुलिस अब दोनों आरोपियों से पूछताछ कर उनके आपराधिक नेटवर्क की पड़ताल कर रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि अलग-अलग राज्यों में हुई घटनाओं में उनकी भूमिका क्या थी और उनके साथ कितने लोग काम करते थे।
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20 दिनों तक चला गुप्त अभियान
93 लाख की ATM लूट के आरोपियों तक पहुंचने के लिए कर्नाटक पुलिस ने करीब 20 दिनों तक गुप्त अभियान चलाया। पुलिस ने अपनी पहचान छिपाकर आरोपियों की गतिविधियों की जानकारी जुटाई और इसके बाद बिहार के वैशाली में कार्रवाई की।
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वारदात के करीब 19 महीने बाद पुलिस दोनों मुख्य आरोपियों तक पहुंच पाई है। अब पूछताछ के आधार पर पुलिस लूटी गई रकम, हथियारों और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
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