झारखंड हाई कोर्ट ने सजा पुनरीक्षण बोर्ड से मांगा ब्योरा

NEWS SAGA DESK

झारखंड हाई कोर्ट ने सजा पुनरीक्षण बोर्ड की 30 जुलाई की बैठक में लिए फैसलों का विस्तृत ब्योरा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

रांची में झारखंड हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दोषियों की समयपूर्व रिहाई से जुड़े मामले में राज्य सरकार से महत्वपूर्ण जानकारी मांगी है। अदालत ने मंगलवार को स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए 30 जुलाई को हुई राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णयों का विस्तृत ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी।

 झारखंड हाई कोर्ट

यह मामला राज्य में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदियों की समयपूर्व रिहाई और राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की नियमित बैठकों से जुड़ा है। झारखंड हाई कोर्ट इस जनहित याचिका के माध्यम से यह भी निगरानी कर रहा है कि राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का निर्धारित तरीके से पालन कर रही है या नहीं।

30 जुलाई की बैठक के फैसलों पर मांगी जानकारी

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात आई कि राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की बैठक 30 जुलाई को आयोजित की गई थी। हालांकि, इस बैठक में किन मामलों पर विचार किया गया और प्रत्येक मामले में क्या निर्णय लिया गया, इसकी स्पष्ट एवं विस्तृत जानकारी सरकार की ओर से अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई थी।

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इसी बिंदु पर झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से बोर्ड की बैठक में लिए गए सभी निर्णयों का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। अदालत यह जानना चाहती है कि बोर्ड के सामने रखे गए मामलों में क्या फैसला लिया गया और उन निर्णयों के आधार क्या रहे।

समयपूर्व रिहाई से जुड़ा है मामला

यह जनहित याचिका राज्य में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे दोषियों की समयपूर्व रिहाई की प्रक्रिया से संबंधित है। ऐसे मामलों में राज्य सजा पुनरीक्षण बोर्ड की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। बोर्ड संबंधित मामलों पर विचार करने के बाद नियमों और निर्धारित मानकों के आधार पर अपनी अनुशंसा या निर्णय की प्रक्रिया आगे बढ़ाता है।

अदालत की निगरानी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पात्र मामलों की समीक्षा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो और संबंधित कैदियों के मामलों पर समयबद्ध तरीके से विचार किया जाए।

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