सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली-2026 पर चिराग पासवान ने CM सम्राट चौधरी को पत्र लिखा। छह बिंदुओं पर पुनर्विचार, आयु सीमा 55 वर्ष करने की मांग की।
News Saga Desk
पटना। बिहार में प्रस्तावित सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली को लेकर केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। उन्होंने नियमावली-2026 के विभिन्न प्रावधानों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। चिराग ने कहा है कि नियुक्ति प्रक्रिया का असर बिहार के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, अभ्यर्थियों, अतिथि शिक्षकों और विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा। इसलिए नियमों को इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि योग्य अभ्यर्थियों और लंबे समय से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखा जा सके।
छह प्रमुख बिंदुओं पर पुनर्विचार की मांग
चिराग पासवान ने सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली के छह प्रमुख बिंदुओं पर मुख्यमंत्री से पुनर्विचार की मांग की है। इनमें यूजीसी रेग्यूलेशन-2018 के टेबल-3ए को लागू करना, अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष करना, बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक भर्ती को स्थायी और नियमित करना तथा भर्ती में डोमिसाइल नीति लागू करना शामिल है।
इसके अलावा उन्होंने बिहार के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियुक्ति व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए।
55 वर्ष की आयु सीमा करने की मांग
चिराग पासवान की प्रमुख मांगों में सहायक प्राध्यापक पद के लिए अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करना शामिल है। उनका तर्क है कि लंबे समय से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे योग्य अभ्यर्थियों और शिक्षकों को भी नियुक्ति प्रक्रिया में अवसर मिलना चाहिए।
बिहार में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति से जुड़े पुराने नियमों में भी 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा का प्रावधान दर्ज रहा है। बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग से जुड़े उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए विज्ञापन वर्ष की 1 जनवरी को अधिकतम आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं होने का उल्लेख है।
अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर भी जोर
चिराग पासवान ने वर्षों से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अतिथि सहायक प्राध्यापक के रूप में काम कर रहे शिक्षकों के भविष्य का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने सरकार से नियमित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति से पहले इन शिक्षकों के अनुभव और उनकी सेवाओं को ध्यान में रखते हुए सेवा-समायोजन या उचित अवसर देने की दिशा में पहल करने का आग्रह किया है।
उनका कहना है कि लंबे समय तक शिक्षण कार्य कर चुके योग्य अतिथि शिक्षकों के अनुभव का इस्तेमाल बिहार के नवनिर्मित महाविद्यालयों में भी किया जा सकता है। इससे एक तरफ अनुभवी शिक्षकों को अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ नए संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली में यूजीसी के प्रासंगिक मानकों को शामिल करने की मांग भी पत्र में प्रमुखता से उठाई गई है। चिराग ने यूजीसी रेग्यूलेशन-2018 के टेबल-3ए को लागू करने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि नियुक्ति के नियम तय करने से पहले उच्च शिक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। नियमों को अंतिम रूप देने के बाद उनकी वजह से राज्य की शैक्षणिक और शोध गतिविधियों पर नकारात्मक असर नहीं पड़ना चाहिए।
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री से सहायक प्राध्यापक नियुक्ति नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक विचार-विमर्श कराने का आग्रह किया है। उन्होंने छात्रों, अभ्यर्थियों, अतिथि शिक्षकों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विषय विशेषज्ञों समेत सभी संबंधित पक्षों की राय लेने की बात कही है।
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