बिरसा बागवानी ग्राम रोजगार योजना में 125 दिन रोजगार, खेती के लिए 2 माह अवकाश और 15 दिनों में मजदूरी भुगतान की गारंटी, जानें पूरी जानकारी।
मधुबनी/झंझारपुर: ग्रामीण रोजगार और आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की बिरसा बागवानी ग्राम रोजगार योजना को लेकर मधुबनी में पंच सम्मेलन सह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी आनंद शर्मा ने त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों को योजना के नियम, कार्यक्षेत्र और मजदूरों से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी। बिरसा बागवानी ग्राम रोजगार योजना को मनरेगा का आधुनिक और विस्तारित स्वरूप बताया गया है, जिसमें रोजगार के दिनों के साथ भुगतान व्यवस्था और ग्रामीण विकास कार्यों का दायरा बढ़ाया गया है।

100 की जगह अब 125 दिन रोजगार
प्रशिक्षण कार्यक्रम में बताया गया कि बिरसा बागवानी ग्राम रोजगार योजना के तहत ग्रामीण श्रमिकों को साल में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी। पहले मनरेगा के तहत 100 दिनों के रोजगार का प्रावधान था। इस तरह नई व्यवस्था में रोजगार की अवधि 25 दिन बढ़ाई गई है।
ग्रामीण परिवारों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कृषि के अलावा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने से दूसरे राज्यों में काम की तलाश में होने वाले पलायन को कम करने में मदद मिल सकती है। पंचायतों को योजना के तहत उपलब्ध कार्यों की पहचान और उनके क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
खेती के मौसम में दो महीने की छुट्टी
बिरसा बागवानी ग्राम रोजगार योजना की एक खास व्यवस्था कृषि कार्यों को ध्यान में रखकर की गई है। इसके तहत ग्रामीण मजदूरों को साल में दो महीने का अवकाश दिया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार योजना में काम करने के कारण किसान और कृषि मजदूर अपने खेतों में जरूरी काम से वंचित न रहें।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था में खेती की अहम भूमिका को देखते हुए यह प्रावधान काफी महत्वपूर्ण है। बुआई, रोपाई और कटाई जैसे कृषि कार्यों के दौरान ग्रामीण श्रमिकों की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए योजना में कृषि सत्र के अनुरूप अवकाश की व्यवस्था की गई है।
15 दिनों में मजदूरी भुगतान का नियम
योजना में मजदूरों के भुगतान को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान रखा गया है। डीएम आनंद शर्मा ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि काम पूरा होने के 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना होगा।
यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के कारण मजदूरी भुगतान में देरी होती है, तो श्रमिक को क्षतिपूर्ति के तौर पर 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन की दर से ब्याज देने का प्रावधान बताया गया है। यह अतिरिक्त राशि संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारी या कर्मचारी से जुर्माने के रूप में वसूल की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य मजदूरों को समय पर उनका पारिश्रमिक दिलाना और भुगतान प्रक्रिया में जवाबदेही तय करना है।
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318 तरह के विकास कार्यों पर रहेगा फोकस
प्रशासन के अनुसार, नई योजना में ग्रामीण विकास कार्यों का दायरा भी बढ़ाया गया है। जहां मनरेगा के तहत 266 प्रकार के कार्यों का प्रावधान बताया गया था, वहीं बिरसा बागवानी ग्राम रोजगार योजना में 318 प्रकार की योजनाएं संचालित की जाएंगी। इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका बढ़ाने वाले कार्य, आपदा प्रबंधन और जलवायु अनुकूल विकास से जुड़े काम प्रमुख होंगे। जरूरत के अनुसार अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय कर भी योजनाएं संचालित की जा सकेंगी। इससे पंचायत स्तर पर स्थानीय जरूरत के हिसाब से विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का अवसर मिलेगा।
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