झारखंड छात्र आंदोलन खत्म हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी मामलों की जांच के लिए सरकार को 2 महीने का समय मिला है। जांच नहीं हुई तो फिर आंदोलन होगा।
News Saga Desk
झारखंड छात्र आंदोलन आखिरकार फिलहाल खत्म हो गया है। जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से जारी धरना-प्रदर्शन को मंगलवार को समाप्त करने का ऐलान किया गया। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आंदोलन स्थगित करने का फैसला लेते हुए राज्य सरकार को दो महीने का समय दिया है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि इस अवधि में यदि मामलों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच पूरी नहीं होती है, तो वे दोबारा बड़ी संख्या में रांची पहुंचकर आंदोलन शुरू करेंगे।
सरकार को दो महीने का समय
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की कोर कमेटी की बैठक में आंदोलन को फिलहाल समाप्त करने का निर्णय लिया गया। छात्रों के मुताबिक, सरकार की ओर से उनकी लगभग सभी प्रमुख मांगों को लेकर सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। इसी आधार पर मंच ने तत्काल आंदोलन जारी रखने के बजाय सरकार को जांच प्रक्रिया पूरी करने के लिए दो महीने का समय देने का फैसला किया।
छात्रों का कहना है कि यह आंदोलन समाप्ति नहीं, बल्कि सरकार को दिया गया एक मौका है। तय अवधि के भीतर जांच पूरी कर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को फिर से व्यापक स्तर पर शुरू किया जाएगा। इस दौरान रांची में बड़ी संख्या में छात्रों के जुटने की चेतावनी भी दी गई है।
छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है कि दो महीने के भीतर निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होने की स्थिति में उनकी अगली रणनीति और अधिक आक्रामक होगी। दोबारा आंदोलन शुरू होने पर सीबीआई जांच की मांग प्रमुख मुद्दा बनेगी।
जेपीएससी-जेएसएससी से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और अनियमितताओं को लेकर छात्र लंबे समय से पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता से हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ता है। इसलिए जांच केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित न रहकर निष्पक्ष और भरोसेमंद तरीके से पूरी होनी चाहिए।
झारखंड छात्र आंदोलन की शुरुआत 25 जुलाई से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना-प्रदर्शन के साथ हुई थी। छात्रों ने जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली, अनियमितताओं और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े सवाल उठाए थे।
कई दिनों तक चले प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। आंदोलन के आगे बढ़ने के साथ सरकार और छात्रों के बीच बातचीत की प्रक्रिया भी शुरू हुई। छात्रों के अनुसार, सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों को लेकर कदम उठाए जाने के बाद आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया गया।
छात्र आंदोलन से जुड़े एक अन्य गुट ने भी सोमवार देर शाम अपना आंदोलन समाप्त करने का ऐलान किया था। इसके बाद मंगलवार को जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच की कोर कमेटी ने भी आंदोलन को फिलहाल खत्म करने का निर्णय लिया।
इस तरह राजधानी में कई दिनों से चल रहा छात्रों का प्रदर्शन अब अस्थायी रूप से समाप्त हो गया है। हालांकि, छात्रों ने सरकार को दी गई दो महीने की समयसीमा को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। आने वाले दिनों में जांच की प्रगति और सरकार की कार्रवाई पर छात्रों की नजर रहेगी।
छात्रों की सबसे बड़ी चिंता भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर है। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करते हैं और परिणाम उनके करियर पर सीधा प्रभाव डालता है। ऐसे में किसी भी कथित अनियमितता की स्थिति में निष्पक्ष जांच की मांग स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है।
सरकार के सामने अब दो महीने की समयसीमा में जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और छात्रों का भरोसा कायम रखने की चुनौती है। यदि जांच समय पर और संतोषजनक तरीके से पूरी होती है, तो आंदोलन दोबारा शुरू होने की संभावना कम हो सकती है। वहीं, छात्रों की मांगों के अनुरूप कार्रवाई नहीं होने पर मामला फिर से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।
जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने आंदोलन समाप्त करने के साथ ही अपनी अगली रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। मंच के अनुसार, सरकार को दो महीने के भीतर संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच पूरी करनी होगी। यदि तय समय में जांच पूरी नहीं हुई, तो छात्र दोबारा बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे।
मंच ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य के आंदोलन में सीबीआई जांच की मांग प्रमुख होगी। यानी फिलहाल आंदोलन थम गया है, लेकिन छात्रों ने अपनी मांगों को समाप्त नहीं किया है। अब आगे की दिशा सरकार की जांच और कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
फिलहाल छात्रों ने सरकार को दो महीने का समय दिया है। इस दौरान जांच की प्रगति और संबंधित मामलों में होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी। छात्रों के लिए यह अवधि सरकार के आश्वासनों को परखने का समय होगी।
यदि निर्धारित समय में जांच पूरी होती है और छात्रों को कार्रवाई संतोषजनक लगती है, तो आंदोलन आगे नहीं बढ़ सकता है। इसके विपरीत, जांच में देरी या कार्रवाई से असंतोष की स्थिति में छात्र संगठन फिर से लामबंद हो सकते हैं। ऐसे में रांची एक बार फिर बड़े छात्र आंदोलन का केंद्र बन सकता है।
फिलहाल झारखंड छात्र आंदोलन खत्म हो गया है, लेकिन छात्रों ने साफ कर दिया है कि यह स्थायी वापसी नहीं है। दो महीने की समयसीमा अब सरकार की कार्रवाई की परीक्षा होगी। जांच पूरी नहीं होने पर छात्र फिर जुटेंगे और इस बार सीबीआई जांच की मांग को आंदोलन का मुख्य आधार बनाया जाएगा।
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