Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को गिरावट रही। सेंसेक्स 285 अंक टूटा, जबकि निफ्टी भी लाल निशान में रहा। जानें बाजार पर दबाव की वजह।
Share Market Today: सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। वेस्ट एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों का असर घरेलू बाजार पर भी दिखाई दिया। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक सीमित रखा।

कारोबार के दौरान BSE सेंसेक्स 284.52 अंक यानी 0.37 फीसदी की गिरावट के साथ 76,979.99 के स्तर पर रहा। वहीं, NSE निफ्टी 50 में 58.10 अंक यानी 0.24 फीसदी की कमजोरी दर्ज की गई और यह 24,117.55 के आसपास कारोबार करता दिखा।
एशियाई बाजार भी रहे कमजोर
भारतीय बाजार में गिरावट का कारण सिर्फ घरेलू परिस्थितियां नहीं थीं। सोमवार को ज्यादातर प्रमुख एशियाई बाजार भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.46 फीसदी गिरा, जबकि ताइवान वेटेड इंडेक्स में 1.17 फीसदी की कमजोरी रही। जापान का निक्केई 225 भी 1.08 फीसदी नीचे रहा। गिफ्ट निफ्टी में 0.61 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, सभी एशियाई बाजारों में कमजोरी नहीं रही। सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.45 फीसदी और थाईलैंड का SET कंपोजिट 0.18 फीसदी ऊपर रहा। अमेरिकी बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले, जिससे एशियाई और भारतीय बाजारों में निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान प्रभावित हुआ।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत बनी चिंता
Share Market Today में निवेशकों की नजर कच्चे तेल पर भी रही। रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड 2.27 फीसदी बढ़कर 90.10 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 2.03 फीसदी की तेजी के साथ 85.09 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक क्रूड की कीमतें ऊंची रहने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर चालू खाते, रुपये की कीमत और महंगाई पर भी पड़ सकता है।
अजय बग्गा के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की दूसरी छमाही में भारत को ऊंचे क्रूड, सामान्य से कम मानसून और अमेरिकी फेड की सख्त नीति के साथ वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव जैसे कई जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है।
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रुपये और महंगाई पर पड़ सकता है असर
महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कई स्तरों पर चुनौती पैदा कर सकता है। तेल आयात महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ सकती है, जिससे रुपये पर दबाव आ सकता है। वहीं, ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने पर महंगाई का दबाव भी बढ़ सकता है।
अगर अमेरिकी ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची रहती हैं, तो डॉलर मजबूत हो सकता है। ऐसे माहौल में विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बाजार अधिक आकर्षक हो सकते हैं और उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ सकता है।
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