हरितालिका तीज पर पशुपतिनाथ मंदिर में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। सुबह 3 बजे चारों द्वार खोले गए और चार मार्गों से श्रद्धालुओं को दर्शन कराया गया।
News Saga Desk
काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में हरितालिका तीज के अवसर पर सुबह से ही महिला व्रती श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं कतारों में पहुंचीं। श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ को व्यवस्थित करने के लिए पशुपतिनाथ मंदिर के चारों द्वार सुबह 3 बजे से ही खोल दिए गए। बारिश के बावजूद महिलाओं में व्रत और पूजा को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।
पशुपति क्षेत्र विकास कोष ने तीज पर्व को देखते हुए मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालुओं को अलग-अलग दिशाओं से मंदिर तक पहुंचाने और दर्शन के बाद सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए चार अलग-अलग दर्शन मार्ग बनाए गए हैं। व्यवस्था का उद्देश्य भीड़ को एक जगह जमा होने से रोकना और दर्शन प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखना है।
सुबह 3 बजे से खुले चारों द्वार
पशुपति क्षेत्र विकास कोष के अनुसार, हरितालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पशुपतिनाथ मंदिर के चारों द्वार तड़के 3 बजे खोल दिए गए। मंदिर में प्रवेश के लिए श्रद्धालुओं को उनके आने वाले क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ाया जा रहा है।
कोष के सदस्य सचिव तीर्थ श्रेष्ठ के मुताबिक, मंदिर में दर्शन के लिए चार प्रमुख रूट निर्धारित किए गए हैं। इन मार्गों पर पुलिस और संबंधित सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में श्रद्धालुओं की कतार को नियंत्रित किया जा रहा है।
चार मार्गों से श्रद्धालुओं को कराया जा रहा दर्शन
पहले मार्ग में मित्रपार्क, उमाकुंड, दक्षिणामूर्ति और कैलाश बद्रीनरसिंह भवन होते हुए श्रद्धालुओं को वासुकीनाथ के उत्तर दिशा वाले द्वार से मंदिर के उत्तर दिशा के रैंप तक पहुंचाया जा रहा है। यहां से भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को पश्चिमी द्वार से बाहर निकाला जा रहा है।

दूसरे मार्ग की व्यवस्था जयबागेश्वरी की ओर से आने वाली महिलाओं के लिए की गई है। इस रूट में दथुटोल, पाचा गणेश, अन्नपूर्णा भंडार और महास्नानघर के सामने बने आकाशे पुल से होते हुए श्रद्धालुओं को भुवनेश्वरी और नासलचोक तक ले जाया जा रहा है। इसके बाद शंकराचार्य मठ के सामने बने आकाशे पुल और निर्धारित कतार के जरिए मंदिर के पश्चिमी हिस्से में बने लकड़ी के रैंप तक पहुंचाया जा रहा है। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को पश्चिमी द्वार से बाहर निकाला जा रहा है।
तीसरा मार्ग सिनामंगल और एयरपोर्ट की तरफ से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निर्धारित किया गया है। उन्हें तिलगंगा पर्यटन काउंटर के पास स्थित द्वार से प्रवेश कराया जा रहा है। इसके बाद राम मंदिर, बागमती नदी किनारे और आर्यघाट पुल होते हुए ब्रह्मनाल तक पहुंचाया जा रहा है। यहां से पूर्वी द्वार के रैंप के जरिए भगवान पशुपतिनाथ के पूर्वी स्वरूप के दर्शन कराकर श्रद्धालुओं को उसी द्वार से बाहर निकाला जा रहा है।
चौथा मार्ग पिंगलास्थान की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए है। इस रास्ते से प्रवेश करने के बाद महिलाओं को चार शिवालय और पंचदेवल वृद्धाश्रम के दक्षिण की ओर बने बड़े द्वार के सामने अस्थायी आकाशे पुल से आगे ले जाया जा रहा है। इसके बाद चौँसट्ठी कोटीलिंगेश्वर के रास्ते मंदिर के दक्षिणी स्वरूप के दर्शन कराए जा रहे हैं। दर्शन के बाद श्रद्धालुओं को उन्मत्त भैरव मंदिर के पश्चिमी हिस्से और मूल भट्ट निवास के सामने से बाहर निकाला जा रहा है।
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करीब आधे घंटे में हो रहे दर्शन
पशुपति क्षेत्र विकास कोष के मुताबिक, सुबह के समय श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए बहुत ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। महिलाएं निर्धारित कतारों में खड़ी होकर अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं। शुरुआती व्यवस्था के दौरान करीब आधे घंटे तक कतार में रहने के बाद व्रती महिलाओं को भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन हो रहे हैं।
पशुपतिनाथ मंदिर में तीज के अवसर पर हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंचती हैं। हरितालिका तीज को महिलाओं के प्रमुख धार्मिक पर्वों में माना जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
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