भागलपुर में बाढ़ का कहर, 8.5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

भागलपुर में गंगा की बाढ़ से 8.56 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। 111 गांव और 437 वार्ड जलमग्न हैं, जबकि परिवार भोजन और सुरक्षा के लिए जूझ रहे हैं।

News Saga Desk

भागलपुर में गंगा नदी के रौद्र रूप ने भागलपुर बाढ़ को बेहद गंभीर मानवीय संकट में बदल दिया है। जिले के 111 गांव और 437 वार्ड बाढ़ की चपेट में हैं। उपलब्ध प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, 2,00,102 परिवारों के 8,56,379 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में लोगों के घरों के आसपास और सड़कों पर पानी भरा है, जिसके कारण सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। हालात ऐसे हैं कि हजारों परिवारों के सामने सुरक्षित रहने के साथ-साथ दो वक्त की रोटी जुटाना भी बड़ी चुनौती बन गया है।

गंगा पार के इलाकों में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है। पूर्व मंत्री बुलो मंडल के आवास के आसपास भी पानी गर्दन तक पहुंचने की बात सामने आई है। पानी कब कम होगा, इसे लेकर लोगों में अनिश्चितता बनी हुई है। इस बीच जिला प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं।

8.56 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित

भागलपुर बाढ़ का दायरा लगातार बड़ा दिखाई दे रहा है। 111 गांवों और 437 वार्डों के 2,00,102 परिवारों के 8,56,379 लोग प्रभावित बताए गए हैं। बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी है।

कई ग्रामीण इलाकों में लोगों के घर पानी से घिरे हुए हैं। जिन परिवारों ने ऊंचे स्थानों पर शरण ली है, उनके सामने भी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने की चुनौती बनी हुई है। बाढ़ का पानी लंबे समय तक जमा रहने से लोगों की आजीविका, आवागमन और घरेलू व्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।

24 हजार से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू

जिला प्रशासन के अनुसार, आपदा प्रभावित इलाकों से अब तक 24,812 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। राहत और बचाव कार्य के लिए 122 नावों का परिचालन किया जा रहा है। जलमग्न इलाकों में नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सामान उपलब्ध कराने का काम किया जा रहा है।

भागलपुर

बाढ़ के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को भी सक्रिय रखा गया है। प्रभावित लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 80 चिकित्सा केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। वहीं पशुओं की सुरक्षा भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। प्रभावित पशुओं की संख्या 79,390 तक पहुंचने की जानकारी दी गई है।

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317 सामुदायिक रसोई से भोजन की व्यवस्था

बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने सबसे बड़ी जरूरत भोजन की है। प्रशासन की ओर से 317 सामुदायिक रसोई चलाई जा रही हैं, ताकि प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा सके।

हालांकि, सामुदायिक रसोई के बावजूद कई परिवार अपने स्तर पर भी खाना पकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन चारों तरफ पानी होने के कारण चूल्हा जलाना आसान नहीं है। सूखी लकड़ियां मिलना बेहद मुश्किल हो गया है और जो जलावन उपलब्ध है, वह भी पानी में भीग चुका है।

बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए दो वक्त का भोजन तैयार करना अब रोजाना की चुनौती बन गया है। भीगी लकड़ियों को सुखाने और आग सुलगाने के लिए लोगों को घंटों मेहनत करनी पड़ रही है।

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