पंडौल सूत मिल विवाद कलेक्ट्रेट की जमीन होगी नीलाम

पंडौल सूत मिल विवाद में बिहार सरकार को बड़ा झटका लगा है। 4.17 करोड़ रुपये के बकाये पर मधुबनी कलेक्ट्रेट की 10 कट्ठा जमीन नीलाम होगी।

News Saga Desk

बिहार के मधुबनी जिले में पंडौल सूत मिल विवाद अब बेहद गंभीर कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत के आदेश के बाद मधुबनी कलेक्ट्रेट परिसर की 10 कट्ठा जमीन और उस पर बने दो मंजिला भवन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अदालत के आदेश के तहत 5 नवंबर को सार्वजनिक बोली लगाई जाएगी। मामला एक निजी कंपनी के करीब 4.17 करोड़ रुपये के बकाये से जुड़ा है, जिसका भुगतान नहीं होने के बाद न्यायालय ने संबंधित सरकारी संपत्ति की नीलामी का आदेश दिया है।

अदालत के नाजीर की ओर से कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार, जिला निबंधन कार्यालय और न्यायालय परिसर में नीलामी का इश्तहार चस्पा किए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कलेक्ट्रेट जिले का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र है, इसलिए वहां नीलामी का नोटिस लगना चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या है पंडौल सूत मिल विवाद का पूरा मामला

पंडौल सूत मिल विवाद की शुरुआत करीब तीन दशक पहले हुई थी। वर्ष 1996-97 के आसपास मधुबनी के पंडौल स्थित को-ऑपरेटिव स्पिनिंग मिल लंबे समय से घाटे में चल रही थी और बंद हो चुकी थी। इसे दोबारा शुरू करने के उद्देश्य से राज्य सरकार के मिल प्रबंधन और एमएस राधा कृष्णा एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौता हुआ था।

समझौते के तहत निजी कंपनी ने मिल संचालन में सहयोग किया। कंपनी की ओर से मिल के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराया गया और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी किया गया। हालांकि, तमाम प्रयासों और निवेश के बावजूद मिल दोबारा लंबे समय तक सुचारू रूप से नहीं चल सकी और अंततः बंद हो गई।

मिल बंद होने के बाद निजी कंपनी की ओर से खर्च की गई रकम की वापसी का मुद्दा सामने आया। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया में चला गया।

आर्बिट्रेटर के फैसले से शुरू हुई कानूनी लड़ाई

रकम की वापसी को लेकर कंपनी ने कानूनी रास्ता अपनाया। विवाद के समाधान के लिए पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश को आर्बिट्रेटर नियुक्त किया गया था। दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के दावों की जांच के बाद आर्बिट्रेटर ने निजी कंपनी के पक्ष में फैसला सुनाया।

फैसले के अनुसार राज्य सरकार को कंपनी की मूल राशि ब्याज सहित वापस करनी थी। निर्धारित समय पर भुगतान नहीं होने के कारण बकाये की रकम पर ब्याज बढ़ता गया। यही राशि आगे चलकर 4 करोड़ 17 लाख 24 हजार 459 रुपये तक पहुंच गई।

पंडौल

सरकार ने आर्बिट्रेटर के फैसले को चुनौती देते हुए पटना हाईकोर्ट का रुख किया। लेकिन 30 सितंबर को हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। इसके बाद जिला अदालत में चल रही निष्पादन कार्रवाई के तहत संपत्ति की नीलामी का रास्ता साफ हो गया।

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कलेक्ट्रेट की कौन सी संपत्ति होगी नीलाम

न्यायालय के आदेश के अनुसार मधुबनी समाहरणालय के दक्षिण में स्थित खेसरा संख्या 4899 की 10 कट्ठा जमीन और उस पर निर्मित दो मंजिला पक्का भवन नीलामी प्रक्रिया में शामिल है।

नीलामी की तारीख 5 नवंबर निर्धारित की गई है। सार्वजनिक बोली न्यायालय परिसर में आयोजित की जाएगी। इच्छुक बोलीदाताओं के लिए अदालत ने अग्रिम राशि जमा करने की शर्त भी निर्धारित की है।

बोली में शामिल होने वाले व्यक्ति या संस्था को कुल बकाये की 10 प्रतिशत राशि, यानी करीब 41.72 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट जमा करना होगा। नीलामी की अन्य शर्तें न्यायालय की ओर से जारी इश्तहार में निर्धारित की गई हैं।

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