डॉ. अनिल कुमार के निर्देशन में रसायनशास्त्र विभाग के छात्रों ने मृदा और जल नमूनों पर रिसर्च प्रेजेंटेशन दिया। जानिए पूरी खबर।
झारखंड के साहिबगंज कॉलेज के रमन विज्ञान भवन स्थित पीजी रसायनशास्त्र विभाग में हाल ही में एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और शोध कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान पीजी सेमेस्टर-IV के 34 विद्यार्थियों ने विभिन्न वैज्ञानिक और अनुप्रयुक्त (Applied) विषयों पर अपने प्रोजेक्ट डिसर्टेशन का पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (PowerPoint Presentation) प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों के इन शोध कार्यों का मुख्य केंद्र बिंदु मृदा एवं जल की गुणवत्ता, उनके भौतिक-रासायनिक मापदंडों (Physico-chemical parameters) तथा उनके आपसी संबंधों का वैज्ञानिक आकलन करना था।

इस शोध अध्ययन के तहत ‘पियर्सन सहसंबंध विश्लेषण’ (Pearson Correlation Analysis) का विशेष रूप से उपयोग किया गया, जिसके माध्यम से विभिन्न मापदंडों के बीच के संबंधों का गहराई से अध्ययन किया गया। इस दौरान झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के चयनित क्षेत्रों—विशेषकर साहिबगंज, भागलपुर, कहलगांव और मुर्शिदाबाद से एकत्र किए गए मृदा व जल नमूनों के प्रयोगशाला विश्लेषण पर विस्तार से चर्चा की गई।
मृदा और जल स्वास्थ्य का पर्यावरण व कृषि में महत्व
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने विद्यार्थियों के शोध प्रयासों की सराहना की। उन्होंने छात्रों को सॉयल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card), जल गुणवत्ता आकलन (Water Quality Assessment) और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े व्यावहारिक विषयों पर आगे भी शोध करने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि मृदा और जल की गुणवत्ता का वैज्ञानिक आकलन न केवल कृषि उत्पादन के लिए, बल्कि पर्यावरण संतुलन और मानव स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार के कुशल मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन किया। इनमें उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता तथा जल में फ्लोराइड एवं आर्सेनिक जैसे हानिकारक तत्वों के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों का गहन अध्ययन शामिल रहा।
डॉ. अनिल कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि रसायनशास्त्र एक ऐसा व्यापक विषय है, जिसमें रोजगार, उन्नत अनुसंधान, कृषि, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण की अपार संभावनाएं छिपी हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं से नेट (NET), जेट (JET), पीएचडी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साथ-साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार (Innovation) में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि युवा अपनी प्रतिभा और ज्ञान के बल पर देश के प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
इस गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान akademik और प्रशासनिक समन्वय का सुंदर उदाहरण देखने को मिला। डॉ. अनिल कुमार ने मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव ज्योति कुमार सिंह और बाहरी परीक्षक सह नियंत्रक डॉ. पी. एन. राय को अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसके अलावा, डॉ. धर्मेंद्र कुमार यादव ने डॉ. अनिल कुमार को पौधा भेंट कर स्वागत किया, तथा प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह को भी अंगवस्त्र से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग की अध्यक्षा डॉ. मीरा चौधरी, अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव सिंह सहित कई अन्य शिक्षक और प्रोफेसर उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल करियर की कामना की।
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