मेकअप करने पर वाली महिलाओं पर सख्ती, तालिबान के राज में महिलाओं की मुश्किलें बढ़ीं

अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान महिलाओं की आजादी और अधिकारों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की एक रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं

NEWS SAGA DESK

अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान महिलाओं की आजादी और अधिकारों को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (UNAMA) की एक रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई के कई मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर के बीच कम से कम 52 महिलाओं और एक बच्ची को ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन और पुरुष अभिभावक के बिना बाहर निकलने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार महिलाओं में कुछ पर रंगीन स्कार्फ पहनने, चेहरे पर मेकअप लगाने और बाल दिखाई देने जैसे आरोप लगाए गए। वहीं, कुछ महिलाओं ने कथित तौर पर शरीर को पूरी तरह ढकने वाले कपड़े नहीं पहने थे। ये गिरफ्तारियां काबुल और हेरात जैसे प्रमुख शहरों में की गईं।

संयुक्त राष्ट्र मिशन ने महिलाओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई और उन्हें कथित तौर पर दी जा रही धमकियों पर चिंता जताई है। UNAMA का कहना है कि सामने आए मामले वास्तविक स्थिति की पूरी तस्वीर नहीं दिखाते। सामाजिक दबाव, बदनामी के डर और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कई महिलाएं शिकायत दर्ज कराने से बचती हैं। ऐसे में वास्तविक मामलों की संख्या अधिक हो सकती है।

रिपोर्ट में महिला दुकानदारों और आम महिलाओं के साथ कथित बदसलूकी, मारपीट और धमकियों की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इन घटनाओं ने अफगानिस्तान में महिलाओं की सुरक्षा और सार्वजनिक जीवन में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ आवाज उठाने पर विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने की कार्रवाई भी चिंता का विषय बनी हुई है। रिपोर्ट में हेरात में महिलाओं की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए प्रदर्शन का जिक्र है, जहां सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक व्यक्ति की मौत और कई लोगों के घायल होने की बात सामने आई थी।

अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की वापसी के बाद तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता पर दोबारा नियंत्रण स्थापित किया। इसके बाद महिलाओं की शिक्षा, रोजगार, पहनावे और सार्वजनिक गतिविधियों पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। इन नियमों को लागू कराने में तालिबान का सदाचार मंत्रालय अहम भूमिका निभाता है।

फिलहाल, इस रिपोर्ट पर तालिबान प्रशासन की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। संयुक्त राष्ट्र की चिंता के बीच अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों, सुरक्षा और स्वतंत्रता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

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