CJP Leaders Judicial Custody: जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में CJP के नेताओं को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया। जानें पूरा मामला।
नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कथित तौर पर बिना अनुमति प्रवेश करने के मामले में सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) से जुड़े नेताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने का मामला सामने आया है। इस कार्रवाई को लेकर संगठन और दिल्ली पुलिस के बीच अलग-अलग दावे किए गए हैं। जहां पुलिस का आरोप है कि नेताओं ने प्रतिबंधों के बावजूद जंतर-मंतर परिसर में प्रवेश किया, वहीं CJP ने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है।

CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने कहा कि जेल भेजे जाने से संगठन के नेता डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि इस तरह की कार्रवाई से उनके रुख में बदलाव नहीं आएगा और संगठन कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बाद वहां प्रवेश के लिए अनुमति जरूरी थी। पुलिस का आरोप है कि CJP के नेताओं ने कथित तौर पर बिना अनुमति परिसर में प्रवेश किया। अधिकारियों के अनुसार, नेताओं ने बंद गेट और बैरिकेड पार कर जंतर-मंतर में प्रवेश किया था। पुलिस की ओर से इस मामले में बिना अनुमति प्रवेश करने, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लागू प्रतिबंधों का उल्लंघन करने, शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बांड की शर्तों का पालन नहीं करने और सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई की। हालांकि, ये पुलिस के आरोप हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष संबंधित कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
CJP ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
CJP के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने हिरासत की कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए सरकार पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जेल भेजे जाने से संगठन के नेता पीछे हटने वाले नहीं हैं।
CJP का रुख है कि संगठन कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अपने पक्ष को संबंधित मंच पर रखेगा। इस मामले ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन, सार्वजनिक स्थानों पर सभा करने की अनुमति और प्रशासन की ओर से लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
हालांकि, किसी भी सार्वजनिक स्थल पर प्रदर्शन करने का अधिकार लागू कानूनों और प्रशासनिक प्रतिबंधों के अधीन होता है। ऐसे मामलों में अनुमति की शर्तों और पुलिस की कार्रवाई की वैधता का आकलन संबंधित तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर किया जाता है।
No Comment! Be the first one.