News Saga Desk
रांची। रिम्स की पुरानी बिल्डिंग की हालत दिनोंदिन खस्ताहाल होती जा रही है। भवन की जर्जर स्थिति के चलते किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन इसके बावजूद अब तक न तो राज्य सरकार और न ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कदम उठाया गया है। रिम्स प्रबंधन ने कई बार पत्राचार कर भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण की मांग की है, परंतु अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि विभिन्न वार्डों में छज्जे, प्लास्टर और यहां तक कि फॉल सीलिंग तक टूटकर गिरने लगी है। सोमवार सुबह पेइंग वार्ड और न्यूरो वार्ड में फॉल सीलिंग गिरने की घटना ने एक बार फिर से सिस्टम की उदासीनता को उजागर कर दिया।
जिस स्थान पर फॉल सीलिंग गिरी, वहां से कुछ ही दूरी पर मरीज इलाजरत थे। इससे पहले भी, लगभग एक माह पूर्व न्यूरोसर्जरी विभाग के सामने सीढ़ियों के ऊपर का बड़ा हिस्सा अचानक गिर गया था, जिसमें कई लोग बाल-बाल बचे थे। इस संबंध में निदेशक डॉ. राजकुमार ने संबंधित विभाग को औपचारिक पत्र भेजकर स्थिति की गंभीरता से अवगत भी कराया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। रिम्स के री-डेवलपमेंट प्लान के अंतर्गत निदेशक ने स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय सचिव से आग्रह किया है कि इंडोर भवनों की मरम्मत कार्य को प्राथमिकता पर जल्द शुरू किया जाए।
पुराने भवन की संरचना बेहद कमजोर हो चुकी है। कई जगहों पर छज्जे गिर चुके हैं, तो कुछ हिस्से खतरनाक रूप से लटक रहे हैं। दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है, जगह-जगह सीलन दिखाई दे रही है, और सीढ़ियों की रेलिंग तक ढीली होकर गिरने की स्थिति में पहुंच चुकी है। पूरी इमारत अब बेहद जर्जर अवस्था में है, जहां इलाज के लिए आने वाले मरीज और उनके परिजन लगातार खतरे के साये में रहते हैं। इसके बावजूद मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण को लेकर कोई ठोस कार्य योजना अब तक अमल में नहीं लाई गई है।
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