News Saga Desk
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) में इन दिनों अंदरूनी हलचल तेज होती नजर आ रही है। राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है और इसे लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि उन्हें “खामोश किया गया है, लेकिन वे हारे नहीं हैं।”
Raghav CHadha ने अपने वीडियो संदेश में सवाल उठाया कि क्या जनहित के मुद्दे उठाना कोई अपराध है। उन्होंने साफ कहा कि वे आम लोगों की आवाज उठाते रहेंगे और उनकी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने अपने समर्थकों को धन्यवाद देते हुए कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उनके इस बयान को पार्टी के अंदर बढ़ते तनाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
दरअसल, AAP ने हाल ही में चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंप दी है। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर मतभेद और गहराने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इसी बीच, Raghav CHadha के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की अटकलें भी जोर पकड़ने लगी हैं। पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने उनकी चुप्पी और बीजेपी के प्रति कथित नरम रुख पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं, दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा है कि यह फैसला खुद राघव चड्ढा को लेना है। दूसरी ओर, AAP सांसद संजय सिंह ने इन तमाम अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें महज अफवाह बताया है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर चड्ढा ऐसा कोई कदम उठाते हैं, तो वे सबसे पहले इसका विरोध करेंगे।
आप पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों पर Raghav CHadha ने फिर पलटवार करते हुए एक और वीडियो जारी किया जिसमे उन्होंने कहा कि-
“AAP पार्टी मुझपर इलज़ाम लगा रही है पहले मैंने सोचा कि मैं इसपर जवाब न दूं लेकिन सौ बार बोले हुए झूठ को लोग सच मान लेते है इसलिए मुझे लगा कि मुझे इसपर जवाब देना चाहिए।” राघव चड्ढा ने कहा कि मुझपर झूठे इल्जाम लगाए जा रहे हैं। दरअसल पार्टी ने राघव चड्ढा को हटाए जाने की पीछे का कारण बताया है कि राघव चड्ढा सदन में अपने ही लोगों का साथ नहीं देते जब विपक्ष वाकआउट करता है तो अपनी कुर्सी पर ही बैठे रहते है विपक्ष के साथ वाकआउट नहीं करते। इसके अलावा पार्टी ने ये भी कहा कि जब विपक्ष CEC के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला रही थी तब राघव ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किये। जबकि राघव चड्ढा ने इन सभी आरोपों को सफ़ेद झूठ बताया है।
कुल मिलाकर, राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने के बाद आम आदमी पार्टी में सियासी हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और क्या यह केवल अंदरूनी असंतोष है या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की आहट।
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