मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने उद्योगों को बढ़ावा देने का किया ऐलान, 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य
News Saga Desk
पटना/मुजफ्फरपुर: बिहार को उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी योजनाओं को गति देने का दावा किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड स्थित महवल औद्योगिक क्षेत्र में 140.95 करोड़ रुपये की लागत से विकसित मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर और साझा सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 से पहले दूसरे राज्यों में मजदूरी करने जाने वाले बिहार के लोगों को अपने प्रदेश में ही पर्याप्त रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में उद्योगों की स्थापना, निवेश को प्रोत्साहन और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार करके रोजगार के नए अवसर पैदा किए जाएंगे। उन्होंने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश करने की अपील करते हुए कहा कि सरकार निवेशकों की जरूरतों के अनुरूप औद्योगिक नीतियां तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
140.95 करोड़ की लागत से विकसित हुआ मेगा लेदर क्लस्टर
मुजफ्फरपुर के महवल औद्योगिक क्षेत्र में शुरू किए गए मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर और साझा सुविधा केंद्र को राज्य में औद्योगिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस परियोजना का उद्देश्य लेदर और फुटवियर से जुड़े कारोबार को प्रोत्साहन देना तथा संबंधित क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के लोगों में प्रतिभा और काम करने की क्षमता है। जरूरत इस बात की है कि उन्हें अपने ही राज्य में नौकरी, स्वरोजगार और उद्यम स्थापित करने के पर्याप्त अवसर मिलें। सरकार बड़े उद्योगों के साथ छोटे कारोबार और नए उद्यमों को भी प्रोत्साहित कर रही है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सके।
2030 से पहले 1,000 मेगावाट का डेटा सेंटर बनाने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार में डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने वर्ष 2030 से पहले राज्य में 1,000 मेगावाट क्षमता का डेटा सेंटर विकसित करने का लक्ष्य दोहराया।
उन्होंने कहा कि इस तरह की परियोजना के लिए पर्याप्त बिजली और मजबूत आधारभूत संरचना की जरूरत होगी। डेटा सेंटर के विकास से राज्य में बड़े निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं। इसके लिए बिजली आपूर्ति, औद्योगिक सुविधाओं और अन्य जरूरी संसाधनों को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बिजली की बढ़ती खपत का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार में एक समय बिजली की खपत 500 मेगावाट से भी कम थी, जबकि अब यह लगभग 10,000 मेगावाट तक पहुंच गई है। उन्होंने अगले पांच वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र को लगभग 10,000 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य भी बताया।
निवेशकों के लिए 30 दिनों में नीति बनाने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगपतियों की जरूरतों के अनुसार औद्योगिक नीतियां तैयार करना चाहती है। पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत पहल की गई हैं। सेमीकंडक्टर और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों के लिए भी नीतियों पर काम किया गया है।
उन्होंने उद्योगपतियों से बिहार में निवेश के प्रस्ताव देने की अपील की। मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार इन प्रस्तावों की समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित क्षेत्र के लिए 30 दिनों के भीतर नीति बनाने की दिशा में काम करेगी।
सरकार की इस पहल का उद्देश्य निवेशकों की आवश्यकताओं को समझना, नीतिगत सहयोग उपलब्ध कराना और राज्य में नए उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहित करना है।
गयाजी, मुजफ्फरपुर और दरभंगा में विकसित होंगे औद्योगिक क्लस्टर
मुख्यमंत्री ने इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की योजना का जिक्र करते हुए बताया कि गयाजी में इसके विकास की प्रक्रिया चल रही है। इसके साथ ही मुजफ्फरपुर और दरभंगा में भी इसी तरह के औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने मुजफ्फरपुर को निवेश की संभावनाओं वाला क्षेत्र बताते हुए कहा कि राज्य के अलग-अलग जिलों में उद्योगों की स्थापना की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं। औद्योगिक क्लस्टर विकसित होने से संबंधित क्षेत्रों में उद्योगों के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने और निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
भूमि अधिग्रहण के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपनी जमीन सरकार को देना चाहता है, तो उसे निर्धारित राशि से 10 प्रतिशत अधिक भुगतान करने की नीति बनाई गई है। सरकार का जोर उद्योगों के लिए जमीन, बिजली, परिवहन और अन्य आधारभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है।
मुजफ्फरपुर से पटना और गयाजी तक रैपिड रेल की योजना
औद्योगिक विकास के साथ मुख्यमंत्री ने परिवहन सुविधाओं के विस्तार की योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरपुर से पटना और पटना से गयाजी तक रैपिड रेल चलाने की योजना पर काम किया जा रहा है।
इसके अलावा, राज्य में हवाई संपर्क बढ़ाने के लिए नए एयरपोर्ट के निर्माण और मौजूदा हवाई अड्डों के विकास से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने मुजफ्फरपुर के पताही में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण की दिशा में भी काम किए जाने की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बेहतर परिवहन और हवाई संपर्क से उद्योगों, व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। हालांकि, इन परियोजनाओं की समयसीमा और क्रियान्वयन की विस्तृत स्थिति संबंधित आधिकारिक घोषणाओं से स्पष्ट होगी।
युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार सरकार युवाओं को रोजगार देने के साथ-साथ उन्हें उद्यमी बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके लिए आर्थिक सहायता और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले पटना के बापू सभागार में उद्योग विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में लगभग 7,000 लोगों को उद्यमिता से जोड़ने की पहल की गई थी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, बड़े उद्योगों के साथ छोटे कारोबार और नए उद्यमों का विस्तार होने से रोजगार के अधिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे युवाओं को अपने राज्य में काम करने का मौका मिलेगा और दूसरे राज्यों में मजदूरी करने के लिए पलायन की मजबूरी कम करने में मदद मिल सकती है।
बिहार को औद्योगिक केंद्र बनाने की तैयारी
महवल औद्योगिक क्षेत्र में मेगा लेदर, फुटवियर एवं एक्सेसरीज क्लस्टर का उद्घाटन राज्य में उद्योगों के विस्तार की दिशा में उठाया गया कदम है। मुख्यमंत्री ने निवेश, बिजली, परिवहन, भूमि और औद्योगिक नीतियों को रोजगार सृजन से जोड़ने पर जोर दिया।
सरकार का लक्ष्य बिहार में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ाना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार करना तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इन योजनाओं का वास्तविक प्रभाव परियोजनाओं के क्रियान्वयन, निवेश और रोजगार के अवसरों में होने वाली वृद्धि पर निर्भर करेगा।
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