नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR को दीपावली के बाद लागू किए जाने की बात कही गई है। जानें इसके नियम और पूरी जानकारी।
डिजिटल भुगतान के दौर में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) आज हर आम और खास की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। चाय की टपरी से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह QR कोड के जरिए पेमेंट किया जाता है। हाल ही में नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के एक नोटिस के बाद से यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अब हर डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) यानी फीस चुकानी होगी? आइए जानते हैं कि इस नए अपडेट का सच्चाई और असर क्या है।

NPCI द्वारा जारी किए गए 13 अक्टूबर के नोटिस के अनुसार, चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को अब दीपावली के बाद लागू किया जाएगा। फिलहाल, इसके लिए कोई पक्की तारीख तय नहीं की गई है, और एक नया संशोधित आधिकारिक सर्कुलर आना अभी बाकी है। दुकानदारों और व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचें और ऑफिशियल गाइडलाइंस का इंतजार करें।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) क्या है और किसे प्रभावित करेगा?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह फीस या शुल्क ढांचा है, जो किसी योग्य (Eligible) मर्चेंट पेमेंट को स्वीकार करने पर मर्चेंट (दुकानदार) से लिया जाता है।
- क्या बदलेगा: यह ताजा बदलाव सिर्फ कुछ चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शन से जुड़ा हुआ है।
- क्या नहीं बदलेगा: आम आदमी द्वारा किसी दुकान के QR कोड को स्कैन करके सामान्य भुगतान करना या अपने किसी दोस्त-रिश्तेदार को पैसे भेजना (P2P) इससे अलग है। इस नोटिस में आम यूजर्स के हर रोज के सामान्य लेन-देन पर एक साथ कोई नया चार्ज थोपने का ऐलान नहीं किया गया है।
कितना हो सकता है खर्च? (एक आसान गणित)
दुकानदारों और ग्राहकों के मन में यह सवाल है कि अगर यह फीस लागू होती है, तो इसका गणित कैसा होगा? इसे समझने के लिए नीचे दिए गए उदाहरण को देखें:
| ट्रांजैक्शन की रकम | 0.4% की दर से गणना | लागू होने वाला नियम / कैप |
| ₹5,000 | ₹20 | सामान्य गणना (मर्चेंट शुल्क का दायरा) |
| ₹10,000 | ₹40 | सामान्य गणना (मर्चेंट शुल्क का दायरा) |
| ₹1 लाख | ₹400 | यहाँ ₹300 की अधिकतम सीमा (कैप) लागू हो जाएगी |
नोट: ये उदाहरण केवल यह समझाने के लिए हैं कि मर्चेंट फीस का पैमाना कैसा हो सकता है, इसका मतलब यह नहीं है कि हर ग्राहक से कोई अतिरिक्त चार्ज वसूला जाएगा। सिर्फ प्रतिशत देखकर यह अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि हर पेमेंट पर कितनी फीस कटेगी, क्योंकि इसके लिए कैटेगरी और छूट के नियम अलग से तय होते हैं।
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