डॉलर का दबदबा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था
यह संकेत कहीं से भी अच्छे नहीं कहे जा सकते, अमेरिका के साथ भारत की कारोबारी स्थिति अप्रत्याशित है और देश के बड़े अर्थशास्त्री संभावित दिक्कतों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। वस्तुतःअमेरिका के साथी और विरोधी दोनों डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल से निपटने की तैयारी कर रहे हैं। इस बात के साफ संकेत हैं कि उनका दूसरा कार्यकाल मौजूदा विश्व व्यवस्था के लिए उनके पहले कार्यकाल की तुलना में अधिक अप्रत्याशित और शायद अधिक उथल-पुथल भरा हो सकता है और भारत भी इससे सुरक्षित नहीं रहेगा।