Chartered Bus Tax Telangana के तहत राज्य सरकार निजी बसों के लिए ‘वन स्टेट-वन टैक्स’ व्यवस्था पर विचार कर रही है। नई नीति से टैक्स ढांचा और राजस्व दोनों बदल सकते हैं।
Chartered Bus Tax Telangana को लेकर तेलंगाना सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। परिवहन विभाग राज्य में संचालित निजी चार्टर्ड बसों के लिए वर्तमान टैक्स व्यवस्था को सरल बनाते हुए “एक राज्य, एक टैक्स” मॉडल लागू करने पर विचार कर रहा है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो अलग-अलग जिलों और रूट के आधार पर लगने वाले टैक्स की जगह सभी निजी बसों पर प्रति सीट समान त्रैमासिक टैक्स लिया जाएगा। फिलहाल इस प्रस्ताव पर अध्ययन जारी है और अंतिम निर्णय से पहले संबंधित हितधारकों से चर्चा की जाएगी।

वर्तमान टैक्स व्यवस्था में क्या है बदलाव का प्रस्ताव?
अभी तेलंगाना में निजी चार्टर्ड बसों पर तीन अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार टैक्स लगाया जाता है। इसमें एक जिले के भीतर चलने वाली बसें, दो जिलों के बीच संचालित बसें और पूरे राज्य में चलने वाली बसों के लिए अलग-अलग टैक्स निर्धारित है। प्रति सीट टैक्स 1,120 रुपये से लेकर 3,285 रुपये तक लिया जाता है।
परिवहन विभाग अब इस व्यवस्था को समाप्त कर सभी बसों के लिए एक समान टैक्स लागू करने की संभावना पर काम कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार प्रति सीट 1,500 रुपये या 1,800 रुपये का समान त्रैमासिक टैक्स तय किया जा सकता है। Chartered Bus Tax Telangana के तहत यह बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से देखा जा रहा है।
राज्य में कितनी निजी बसें संचालित हैं?
परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार तेलंगाना में 6,641 निजी कॉन्ट्रैक्ट कैरिज बसें संचालित हैं। इनमें निजी ट्रैवल ऑपरेटरों की बसों के अलावा विभिन्न कंपनियों द्वारा कर्मचारियों के आवागमन के लिए चलाई जाने वाली बसें भी शामिल हैं।
मौजूदा टैक्स व्यवस्था से विभाग को प्रत्येक तीन महीने में लगभग 117.83 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। यदि नया टैक्स 1,500 रुपये प्रति सीट निर्धारित किया जाता है तो वार्षिक राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। वहीं 1,800 रुपये प्रति सीट टैक्स लागू होने की स्थिति में विभाग को और अधिक आय मिलने का अनुमान है।
छोटे ऑपरेटरों पर पड़ सकता है असर
नई व्यवस्था का सबसे अधिक प्रभाव उन बस मालिकों पर पड़ सकता है जो केवल एक जिले के भीतर अपनी बसों का संचालन करते हैं। वर्तमान में ऐसी करीब 5,100 बसों पर अपेक्षाकृत कम टैक्स लगाया जाता है।
यदि सभी बसों के लिए समान टैक्स लागू किया जाता है तो सीमित क्षेत्र में सेवाएं देने वाले ऑपरेटरों की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में छोटे बस संचालकों की आर्थिक चुनौतियां बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। इसी कारण विभाग अंतिम निर्णय से पहले सभी संबंधित पक्षों की राय लेने की बात कह रहा है।
आधिकारिक बयान
परिवहन विभाग के सूत्रों के अनुसार फिलहाल Chartered Bus Tax Telangana से जुड़ा प्रस्ताव अध्ययन के चरण में है। अभी किसी प्रकार का अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि नई टैक्स व्यवस्था लागू करने से पहले बस मालिकों और संबंधित संगठनों से विस्तृत चर्चा की जाएगी, ताकि व्यावहारिक और संतुलित समाधान तैयार किया जा सके।
विभाग राज्यव्यापी परमिट और संयुक्त जिला परमिट जैसी व्यवस्थाओं को भी नई नीति में शामिल करने की संभावनाओं का परीक्षण कर रहा है।
मैक्सी कैब और वैन मालिकों को भी मिल सकता है नया विकल्प
नई नीति के तहत 8 से 17 सीटों वाले मैक्सी कैब और वैन संचालकों के लिए भी बदलाव प्रस्तावित है। वर्तमान में इन वाहनों पर हर तीन महीने में टैक्स जमा करना होता है। विभाग महाराष्ट्र और कर्नाटक की व्यवस्था का अध्ययन कर रहा है, जहां लाइफटाइम टैक्स का विकल्प उपलब्ध है।
इसी मॉडल को देखते हुए तेलंगाना में भी मैक्सी कैब और वैन मालिकों को त्रैमासिक टैक्स या लाइफटाइम टैक्स में से किसी एक विकल्प का चयन करने की सुविधा देने पर विचार किया जा रहा है।
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सार्वजनिक जानकारी और संभावित प्रभाव
यदि Chartered Bus Tax Telangana लागू होता है तो इससे टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी और सरल बन सकती है। सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है, जबकि परिवहन क्षेत्र में नियमों का एकरूपता से पालन भी आसान होगा। हालांकि अंतिम निर्णय से पहले बस ऑपरेटरों की चिंताओं और सुझावों पर विचार किया जाएगा, ताकि नई व्यवस्था राजस्व वृद्धि के साथ परिवहन व्यवसाय के लिए भी संतुलित साबित हो सके।
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