NEWS SAGA DESK
देवघर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति गंभीर होती जा रही है। आयुष्मान भारत योजना के तहत विकसित किए गए आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का हाल बेहद खराब है। मधुपुर अनुमंडल के महुआ डाबर गांव समेत कई उप–स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं, जिससे ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पा रहा है। जिले में कुल 183 उप–स्वास्थ्य केंद्र हैं, जिनमें से लगभग 100 को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में अपग्रेड किया गया था। नियम के अनुसार, प्रत्येक केंद्र पर एक सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी, एक एएनएम और एक एमपीडब्ल्यू की तैनाती अनिवार्य है, लेकिन आधे से अधिक केंद्रों में स्टाफ नियमित रूप से मौजूद नहीं रहता।
ग्रामीणों का कहना है कि सप्ताह में केवल एक-दो दिन ही केंद्र खुलते हैं, बाकी दिनों में ताला लटका रहता है। सर्दी–खांसी, बुखार, ब्लड प्रेशर और शुगर जांच जैसी सामान्य सेवाएं भी लगातार उपलब्ध नहीं हैं, जिससे लोगों को मजबूरन शहर या अनुमंडल अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. युगल किशोर चौधरी ने स्वीकार किया कि मैनपावर और संसाधनों की कमी एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं और जल्द ही सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को सुचारू रूप से संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
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