News Saga Desk
हजारीबाग सेंट्रल जेल से 30 दिसंबर की रात फरार हुए तीन कैदियों के मामले में जांच के दौरान गंभीर लापरवाही और साजिश के संकेत मिले हैं। फरार कैदियों में शामिल देवा भुईयां पहले भी धनबाद जेल से भाग चुका है। इसके बावजूद उस पर लागू सुरक्षा नियमों में ढील बरती गई, जिसकी अब जांच की जा रही है।
जेल प्रशासन के अनुसार, जेल से भागने का रिकॉर्ड रखने वाले कैदियों की पहचान और निगरानी के लिए उनके सिर पर लाल टोपी पहनाने और सेल में रखने का प्रावधान है। हजारीबाग सेंट्रल जेल में देवा भुईयां को शुरुआत में इसी नियम के तहत लाल टोपी पहनाकर सेल में रखा गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद कथित रूप से सुनियोजित तरीके से उसकी लाल टोपी हटा दी गई और उसे सेल के बजाय सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
जांच में सामने आया है कि जेलकर्मियों की मिलीभगत से देवा भुईयां को अन्य दो कैदियों-जीतेंद्र रवानी और राहुल रजवार-के साथ सेक्टर-6 के वार्ड नंबर चार में रखा गया। तीनों कैदियों को POCSO एक्ट के तहत सजा सुनाई जा चुकी है और मार्च 2025 में उन्हें धनबाद जेल से हजारीबाग सेंट्रल जेल लाया गया था।
देवा भुईयां इससे पहले वर्ष 2020 में धनबाद जेल से भी फरार हो चुका था। बाद में उसे पकड़कर फिर धनबाद जेल में रखा गया था। ऐसे कैदी के साथ सुरक्षा मानकों में ढील बरतना अब जेल प्रशासन के लिए बड़ा सवाल बन गया है।
मुख्यालय को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक, फरारी की रात वार्ड की खिड़की की छड़ काटी गई, जिसके बाद तीनों कैदी बाहर निकले। आंतरिक दीवार पार करने के बाद वे जेल की बाहरी दीवार तक पहुंचे, जहां बाहर से फेंकी गई रस्सी की मदद से उन्होंने दीवार लांघकर जेल से भागने में सफलता पाई।
फिलहाल जांच दल यह पता लगाने में जुटा है कि देवा भुईयां के सिर से लाल टोपी हटाने और उसे सामान्य वार्ड में रखने का आदेश किसने दिया। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वार्ड की छड़ काटने और बाहर से रस्सी उपलब्ध कराने में किन लोगों ने मदद की। अभी तक किसी बाहरी व्यक्ति या जिम्मेदार कर्मचारी की स्पष्ट पहचान नहीं हो सकी है।
जेल प्रशासन ने इस मामले में प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए सिर्फ उसी क्षेत्र में तैनात कर्मचारियों को निलंबित किया है, जबकि साजिश में शामिल अन्य लोगों की तलाश जारी है।
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