News Saga Desk
ईरान युद्ध को लेकर पाकिस्तान की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। तेहरान ने अमेरिका द्वारा प्रस्तुत 15 पॉइंट पीस प्लान को नकार दिया है और औपचारिक रूप से मध्यस्थों को सूचित कर दिया है कि वह इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। शुक्रवार को मध्यस्थों को यह जानकारी दी गई कि यह पहल अब ‘डेड एंड’ पर पहुंच चुकी है।
अमेरिका-ईरान वार्ता ढांचा ध्वस्त
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वॉशिंगटन की मांगें उसके लिए स्वीकार्य नहीं हैं। इसके चलते मौजूदा वार्ता ढांचा लगभग खत्म हो गया है। इस फैसले से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है, जिसने खुद को निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत किया था और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहा था।
अमेरिका और चीन-पाक के प्रस्ताव में क्या था?
अमेरिका ने ईरान को जो पीस प्लान पेश किया था, उसमें मुख्य रूप से होर्मुज स्ट्रेट खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग थी। इसके बाद चीन और पाकिस्तान ने पांच पॉइंट का अपना प्रस्ताव पेश किया, जिसमें युद्ध को फैलने से रोकने, मानवीय सहायता पहुंचाने, शांति वार्ता शुरू करने, नागरिक एवं ऊर्जा सुविधाओं की सुरक्षा और यूएन चार्टर के तहत क्षेत्रीय संप्रभुता का सम्मान करने की बात शामिल थी।
ईरान की शर्तें और असहमति
ईरान ने भी पांच पॉइंट की शर्तें रखी थीं, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट की मान्यता, अमेरिकी सैन्य बेस हटाना, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा, भविष्य में हमला न करने की गारंटी और सभी प्रकार की शत्रुता समाप्त करना शामिल था। अमेरिकी पक्ष ने इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया। इसके बाद चीन और पाकिस्तान ने अपना प्लान पेश किया।
इस्लामाबाद में हुई चौतरफा बैठक
पाकिस्तान और चीन के प्लान से पहले इस्लामाबाद में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों की चौतरफा बैठक हुई थी, जिसमें युद्धविराम पर चर्चा की गई। पाकिस्तान ने स्वयं को मध्यस्थ के रूप में पेश किया, लेकिन अब उसकी कोशिशें पूरी तरह असफल हो गई हैं।
पाकिस्तान पर बढ़ता दबाव
प्लान के फेल होने से पाकिस्तान पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच बातचीत हुई, जिसमें भरोसा बढ़ाने पर जोर दिया गया। फिर भी पाकिस्तान की चिंता सऊदी अरब, भारत के साथ तनाव और अफगान सीमा पर अस्थिरता को लेकर है।
ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों ने कई खाड़ी देशों को निशाना बनाया है, जिससे बड़े युद्ध का खतरा बढ़ गया है। फिलहाल सऊदी अरब ने संयम दिखाया है, लेकिन किसी भी जवाबी कार्रवाई से क्षेत्रीय संघर्ष फैल सकता है।
आर्थिक दबाव और ऊर्जा संकट
युद्ध ने पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव भी बढ़ाया है। होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की बंदिशों के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 458 रुपये और डीजल 520 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। ईरान ने हाल ही में पाकिस्तानी जहाजों के लिए सीमित आवाजाही दी, लेकिन इससे कूटनीतिक प्रगति नहीं हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध और दो सप्ताह से अधिक चला, तो पाकिस्तान के लिए तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे देश पर और अधिक दबाव बनेगा।
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