इजराइल चुनाव के शुरुआती नतीजों में बेंजामिन नेतन्याहू समर्थक गठबंधन पिछड़ता दिख रहा है। विरोधी खेमे के पास 67 सीटें हैं, लेकिन अरब पार्टियों के साथ गठबंधन पर असहमति ने सस्पेंस बढ़ा दिया है।
मध्य पूर्व के सबसे प्रमुख लोकतांत्रिक देश इजराइल में हुए हालिया संसदीय चुनावों ने देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सस्पेंस पैदा कर दिया है। मतगणना के शुरुआती नतीजों और रुझानों ने राजधानी येरुशलम से लेकर तेल अवीव तक सत्ता के समीकरणों को पूरी तरह से उलझा दिया है। लंबे समय तक इजराइल के प्रधानमंत्री रहे बेंजामिन नेतन्याहू की राजनीतिक राह इस बार आसान नजर नहीं आ रही है।

प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, नेतन्याहू के समर्थक दलों का गुट बहुमत के जादुई आंकड़े से काफी दूर नजर आ रहा है। दूसरी ओर, नेतन्याहू विरोधी खेमे की कुल सीटें मिलाकर आंकड़े काफी मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन वैचारिक मतभेदों और अंदरूनी खींचतान के कारण विपक्ष के लिए सरकार का गठन करना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है।
120 सीटों की संसद और बहुमत का पेंच
इजराइल की संसद (नेसेट) में कुल 120 सीटें हैं, जहाँ सरकार बनाने और बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन होना अनिवार्य है। केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी आंशिक आंकड़ों के मुताबिक:
- नेतन्याहू समर्थक दल: 53 सीटें
- यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी दल: 48 सीटें
- अरब नेतृत्व वाली पार्टियां: 19 सीटें
गणितीय रूप से देखें तो नेतन्याहू विरोधी सभी दलों (यहूदी विपक्षी दल + अरब पार्टियां) की सीटों को जोड़ने पर यह संख्या 67 तक पहुँच जाती है, जो बहुमत के 61 के आंकड़े से 6 सीटें अधिक है। लेकिन वास्तविकता में यह कोई संगठित या औपचारिक गठबंधन नहीं है। मुख्य समस्या यह है कि यहूदी नेतृत्व वाले कई प्रमुख विपक्षी दल अरब पार्टियों को सरकार में शामिल करने या उनके समर्थन से सरकार चलाने के पूरी तरह खिलाफ हैं। यही राजनीतिक मतभेद नए गठबंधन के गठन में सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है।
सड़कों पर उतरी जनता: यहूदी-अरब साझा सरकार की मांग
चुनाव परिणामों की इस राजनीतिक अनिश्चितता के बीच इजराइल की जनता में भी हलचल तेज हो गई है। देश के प्रमुख शहरों में आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर एक समावेशी सरकार की मांग शुरू कर दी है। इजराइली समाचार पत्र ‘हारेत्ज’ (Haaretz) के अनुसार, यरुशलम के पेरिस स्क्वायर, तेल अवीव के मेसिला पार्क और हाइफा के यूनेस्को स्क्वायर में सैकड़ों प्रदर्शनकारी एकत्र हुए।
हाथों में बैनर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि देश को स्थिर बनाने के लिए एक ऐसा यहूदी-अरब साझा गठबंधन बनाया जाना चाहिए, जिसमें दोनों समुदायों की उचित राजनीतिक भागीदारी हो। नागरिकों का मानना है कि देश को राजनीतिक स्थिरता की सख्त जरूरत है।
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