झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों में अनुपस्थित डॉक्टरों पर सख्ती दिखाई है। 28 जुलाई तक योगदान नहीं देने वाले डॉक्टरों की नियुक्ति रद्द कर सेवा समाप्त की जाएगी।
झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में लंबे समय से अनुपस्थित डॉक्टरों के खिलाफ बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि जिन सहायक प्राध्यापकों और चिकित्सकों ने पदस्थापन के बावजूद अब तक अपने संस्थान में योगदान नहीं दिया है, उन्हें 28 जुलाई तक अंतिम अवसर दिया जा रहा है। यदि निर्धारित समय सीमा तक वे अपनी ड्यूटी जॉइन नहीं करते हैं, तो उनकी नियुक्ति स्वतः निरस्त मानी जाएगी और भविष्य में उनका कोई भी दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस फैसले से राज्य के सरकारी चिकित्सा संस्थानों में अनुशासन और कार्य संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश गया है।

अनुपस्थित डॉक्टरों पर सख्त हुआ झारखंड स्वास्थ्य विभाग
झारखंड स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 18 मार्च को जारी अधिसूचना के माध्यम से कई सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति और विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पदस्थापन किया गया था। इसके बावजूद कई डॉक्टरों ने अब तक अपने-अपने संस्थानों में योगदान नहीं दिया। विभाग ने 18 जून को भी पत्र जारी कर उन्हें तत्काल कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद भी कई चिकित्सक बिना किसी सूचना या वैध कारण के अनुपस्थित रहे।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि लगातार अनुपस्थिति से मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण व्यवस्था और मरीजों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इसलिए अब ऐसे मामलों में कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है।
28 जुलाई अंतिम समय सीमा
विभाग ने संबंधित चिकित्सकों को अंतिम चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि 28 जुलाई तक हर हाल में अपने पदस्थापन स्थल पर योगदान दें। यदि तय समय तक वे कार्यभार ग्रहण नहीं करते हैं, तो उनकी नियुक्ति अधिसूचना को निरस्त कर दिया जाएगा। इसके बाद उनकी सेवा समाप्त मानी जाएगी और उन्हें किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी राहत नहीं मिलेगी।
यह निर्णय राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में नियमित शिक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।
नेशनल मेडिकल कमीशन के मानकों का दबाव
इस कार्रवाई के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मानकों का पालन भी है। आयोग लगातार मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों और सहायक प्राध्यापकों की निर्धारित संख्या बनाए रखने पर जोर दे रहा है। पर्याप्त फैकल्टी नहीं होने की स्थिति में मेडिकल सीटों की संख्या, मान्यता और शैक्षणिक गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
झारखंड स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि रिक्त पदों और अनुपस्थित चिकित्सकों के कारण मेडिकल शिक्षा और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे में खाली पदों पर नए योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति का रास्ता भी इस कार्रवाई से साफ होगा।
किन डॉक्टरों पर होगी कार्रवाई
विभाग द्वारा जारी सूची के अनुसार जिन चिकित्सकों पर कार्रवाई की संभावना है, उनमें डॉ. रोहित (जमशेदपुर), डॉ. मनीष कुमार मुंडा, डॉ. अभिषेक जायसवाल, डॉ. विनीत गर्ग (धनबाद), डॉ. कार्तिक चंद्र बेसरा (हजारीबाग), डॉ. अविनाश कुमार, डॉ. कुणाल राज, डॉ. प्रिथा रॉय (पलामू), डॉ. शिवशंकर मुंडा, डॉ. लाल बहादुर प्रसाद, डॉ. संदीप मारकुस तथा डॉ. तरुण कुमार (दुमका) शामिल हैं।
विभागीय जानकारी के अनुसार इनमें से कुछ डॉक्टर सितंबर 2025 से ही बिना सूचना के अनुपस्थित बताए जा रहे हैं।
पृष्ठभूमि
झारखंड सरकार लगातार राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर काम कर रही है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, मेडिकल सीटों में वृद्धि और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में नियुक्त चिकित्सकों की अनुपस्थिति से इन योजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
डॉक्टरों की कमी का सीधा असर मरीजों के इलाज और मेडिकल छात्रों की पढ़ाई पर पड़ता है। कई विभागों में शिक्षकों की संख्या कम होने से विशेषज्ञ सेवाएं प्रभावित होती हैं। यदि रिक्त पद समय पर नहीं भरते हैं तो मेडिकल कॉलेजों की मान्यता और भविष्य में सीट बढ़ाने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
झारखंड स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई न केवल अनुशासन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने का भी प्रयास माना जा रहा है।
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आधिकारिक जानकारी
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि 28 जुलाई के बाद योगदान नहीं देने वाले चिकित्सकों की नियुक्ति अधिसूचना विलोपित कर दी जाएगी। इसके बाद उनकी सेवा समाप्त मानी जाएगी और भविष्य में उनका कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग ने सभी संबंधित डॉक्टरों से निर्धारित समय सीमा के भीतर योगदान देने की अपील की है।
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