JPSC परीक्षा घोटाला: CID ने लखनऊ से 5 आरोपियों को किया गिरफ्तार

NEWS SAGA DESK

JPSC परीक्षा घोटाले में CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ से 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया। 14वीं JPSC परीक्षा में कथित धांधली मामले में जांच जारी है।

JPSC परीक्षा घोटाला मामले में झारखंड अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को बड़ी सफलता मिली है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी की जांच के दौरान सीआईडी ने उत्तर प्रदेश पुलिस के सहयोग से लखनऊ से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 (दिनांक 22 जुलाई 2026) में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर 5 अगस्त 2026 को की गई। जांच एजेंसियों ने छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य भी जब्त किए हैं।

JPSC परीक्षा घोटाला

CID की बड़ी कार्रवाई

JPSC परीक्षा घोटाला की जांच में सीआईडी लगातार साक्ष्य जुटा रही थी। जांच के दौरान मिले इनपुट के आधार पर रांची और उत्तर प्रदेश पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर लखनऊ में कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और मामले में उनकी भूमिका की गहन जांच जारी है।

सीआईडी का कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी कराई जाएगी, जिससे परीक्षा में कथित गड़बड़ी के पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।

किन लोगों को किया गया गिरफ्तार?

सीआईडी ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

  • उमाकांत उरांव, मूल निवासी लोहरदगा और वर्तमान में रांची के बरियातू क्षेत्र के निवासी हैं। जांच एजेंसी के अनुसार उन पर 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में कथित रूप से अनुचित साधनों का उपयोग कर सफल होने और अभ्यर्थियों को परीक्षा में मदद उपलब्ध कराने वाले एजेंट के रूप में काम करने का आरोप है।
  • रोशन केरकेट्टा, नगड़ी (रांची) के निवासी हैं और वर्तमान में कोकर में रहते हैं। उन पर परीक्षा में कथित रूप से धोखाधड़ी कर सफलता प्राप्त करने का आरोप है।
  • मनोज कुमार, धुर्वा (रांची) निवासी हैं। जांच के अनुसार उन्होंने भी कथित रूप से अनियमित तरीके से परीक्षा में सफलता हासिल की।
  • रक्षक सिंह, लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के निवासी हैं और परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत बताए गए हैं। उन पर भी परीक्षा में कथित धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है।
  • धर्मेन्द्र कुमार, रांची के कोतवाली क्षेत्र के निवासी हैं। जांच एजेंसी उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है।

डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जब्त

JPSC परीक्षा घोटाला की जांच के दौरान सीआईडी ने छापेमारी में कई महत्वपूर्ण डिजिटल और अभिलेखीय साक्ष्य बरामद किए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन साक्ष्यों को विधिवत जब्त कर लिया गया है और अब इनकी तकनीकी एवं फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। जांच एजेंसी का मानना है कि इन साक्ष्यों से परीक्षा में कथित अनियमितताओं और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा को लेकर पिछले कुछ समय से कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोप लगाए जा रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीआईडी को सौंपी गई। जांच के दौरान विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जा रही है, जिसमें अभ्यर्थियों, बिचौलियों और परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका भी शामिल है। हालिया गिरफ्तारी को इस जांच में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।


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सीआईडी ने बताया है कि यह कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है और मामले की जांच अभी जारी है। अधिकारियों के अनुसार आगे मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जांच का दायरा अभी खुला हुआ है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ की जा सकती है।

JPSC परीक्षा घोटाला की जांच का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करना और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच करना है। अभ्यर्थियों और आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें और जांच पूरी होने से पहले किसी भी अपुष्ट जानकारी या अफवाह पर विश्वास न करें।

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