झारखंड विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र शुरू हो गया। अनुपूरक बजट के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होगी।
News Saga Desk
रांची: झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू हो गया। पांच दिवसीय सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने सभी सदस्यों का स्वागत किया और सदन की कार्यवाही को शांतिपूर्ण, गरिमापूर्ण और जनहित के मुद्दों पर केंद्रित रखने की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि विधानसभा लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण मंच है, जहां कानून निर्माण के साथ सरकार के कामकाज की समीक्षा और जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित की जाती है।
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र ऐसे समय में हो रहा है, जब राज्य में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, विकास और विभिन्न जनहित के मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट भी पेश किया जाएगा। इसके अलावा विधायक प्रश्नकाल के माध्यम से सरकार से अपने क्षेत्रों और राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों पर जवाब मांगेंगे।
पांच दिवसीय सत्र में क्या होगा खास?
विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र पांच दिनों का होगा। सत्र के चार दिन प्रश्नकाल के लिए निर्धारित किए गए हैं। प्रश्नकाल के दौरान विधायक सरकार के विभिन्न विभागों से संबंधित सवाल उठाकर जनता की समस्याओं और सरकारी योजनाओं की स्थिति पर जानकारी मांग सकेंगे।
वहीं, 12 अगस्त को गैर-सरकारी सदस्यों के कार्यों के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान विधायक निजी विधेयक और जनहित से जुड़े प्रस्ताव सदन में रख सकेंगे। इससे विधायकों को अपने क्षेत्रों और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को सदन के सामने रखने का अवसर मिलेगा।
पेश होगा 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट
सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। अनुपूरक बजट के जरिए सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान अतिरिक्त खर्च या उन मदों के लिए आवश्यक राशि का प्रावधान करती है, जिनके लिए मूल बजट में पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होती।
इस वजह से अनुपूरक बजट पर सदन में व्यापक चर्चा की संभावना है। विपक्ष की ओर से सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं और खर्च से जुड़े मुद्दे उठाए जा सकते हैं, जबकि सत्ता पक्ष सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों का पक्ष रख सकता है।
अध्यक्ष ने शांतिपूर्ण कार्यवाही की अपील की
सत्र के उद्घाटन अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि विधानसभा का मुख्य उद्देश्य कानून बनाना, सरकार के कार्यों की समीक्षा करना और जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
उन्होंने लोकतंत्र में संवाद और सहमति के महत्व पर भी जोर दिया। अध्यक्ष के मुताबिक लोकतंत्र केवल बहुमत के आधार पर मजबूत नहीं होता, बल्कि संवाद, सहमति और एक-दूसरे के विचारों के सम्मान से उसकी मजबूती बढ़ती है।
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रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य पर चर्चा की उम्मीद
अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान और तकनीक के साथ जलवायु परिवर्तन और आर्थिक चुनौतियां भी महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। ऐसे में झारखंड के विकास से जुड़े मुद्दों पर गंभीर और सार्थक चर्चा जरूरी है।
सत्र में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी विधायकों की ओर से सवाल और चर्चा होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों को लेकर भी सदन में सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र सुचारु रूप से संचालित करने के लिए सभापति मंडल का गठन किया गया है। इसमें हेमलाल मुर्मू, चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह, नीरल पूर्ति, रामचंद्र सिंह और डॉ. नीरा यादव को शामिल किया गया है।
सभापति मंडल की भूमिका सदन की कार्यवाही के संचालन में महत्वपूर्ण होगी। इसके सदस्य आवश्यकता के अनुसार सदन की अध्यक्षता करेंगे और कार्यवाही को निर्धारित नियमों के तहत आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे।

सत्र की कार्यवाही से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों और कार्यक्रमों पर विचार के लिए कार्य मंत्रणा समिति का भी गठन किया गया है। समिति में विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।
समिति में प्रदीप यादव, नीरल पूर्ति और अरूप चटर्जी को भी शामिल किया गया है। दीपक बिरवा को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में जगह दी गई है।
विधानसभा अध्यक्ष ने पीआरएस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2025 में देश की विधानसभाओं की औसत बैठक 24 दिनों तक चली थी, जबकि झारखंड विधानसभा की बैठक 31 दिनों तक हुई। उन्होंने इसे सकारात्मक परंपरा बताते हुए सभी सदस्यों से इसे आगे भी बनाए रखने की अपील की।
अध्यक्ष के अनुसार, सदन की बैठकें अधिक होने से विधायकों को जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और सरकार से जवाब मांगने का अधिक अवसर मिलता है।
झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र राज्य के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकता है। पांच दिनों के दौरान विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं के साथ राज्यस्तरीय मुद्दों को भी सदन में उठा सकेंगे।
अनुपूरक बजट पर चर्चा के साथ सरकार की योजनाओं और विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा भी संभव है। ऐसे में सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर बहस देखने को मिल सकती है।
विधानसभा अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो ने सत्र के पहले दिन सभी सदस्यों का स्वागत किया और शांतिपूर्ण तथा गरिमापूर्ण कार्यवाही की अपील की। उन्होंने बताया कि पांच दिवसीय सत्र में चार दिन प्रश्नकाल के लिए निर्धारित हैं और 12 अगस्त को गैर-सरकारी सदस्यों के कार्यों के लिए रखा गया है।
सत्र में वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा। इसके अलावा राज्य के विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य जनहित के विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि पांच दिनों के दौरान सदन में किन मुद्दों पर सबसे अधिक बहस होती है और सरकार की ओर से क्या जवाब दिए जाते हैं।
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