मनरेगा कैग रिपोर्ट: झारखंड में 321 करोड़ मजदूरी बकाया

NEWS SAGA DESK

मनरेगा कैग रिपोर्ट में झारखंड में 321.84 करोड़ रुपये मजदूरी भुगतान बकाया मिला। 32.62 लाख पुराने वाहनों पर खर्च और 49% योजनाएं अधूरी पाई गईं।

रांची: झारखंड में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना यानी मनरेगा के क्रियान्वयन को लेकर मनरेगा कैग रिपोर्ट झारखंड में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2024 के दौरान अकुशल मजदूरों को 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया। इतना ही नहीं, मनरेगा की मजदूरी मद से 32.62 लाख रुपये पुराने सरकारी वाहनों के रखरखाव पर खर्च किए गए।

 मनरेगा कैग रिपोर्ट झारखंड

यह रिपोर्ट झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान पेश की गई। इसमें वर्ष 2019-24 के बीच मनरेगा के क्रियान्वयन, योजनाओं की प्रगति, मजदूरों को मिलने वाले रोजगार और योजना के निर्धारित उद्देश्यों की स्थिति का ऑडिट किया गया है।

मजदूरी मद से पुराने वाहनों पर खर्च

कैग की मनरेगा कैग रिपोर्ट झारखंड में बताया गया है कि गिरिडीह, गुमला और पाकुड़ जिलों में वर्ष 2019 से 2022 के बीच मजदूरी मद की राशि से 32.62 लाख रुपये पुराने सरकारी वाहनों के रखरखाव पर खर्च किए गए।

इस राशि से वाहनों के टायर, बैटरी और अन्य सामान बदलने की जानकारी सामने आई है। कैग ने इस खर्च को मनरेगा के प्रावधानों के विपरीत माना है। रिपोर्ट के अनुसार, मजदूरी मद की राशि का इस्तेमाल निर्धारित कार्यों के अलावा किसी दूसरे उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता।

321.84 करोड़ रुपये मजदूरों को नहीं मिले

कैग ऑडिट में मनरेगा के तहत काम करने वाले अकुशल मजदूरों की मजदूरी को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, 2019 से 2024 के दौरान कुल 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया।

ऑडिट के दौरान यह भी पाया गया कि मार्च 2025 तक यह बकाया राशि मजदूरों को नहीं मिल सकी थी। कैग ने मजदूरी भुगतान में देरी को मजदूरों के हित से जुड़ा गंभीर विषय माना है और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की जरूरत बताई है।

ग्रामीण परिवारों के लिए मनरेगा आय और रोजगार का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में मजदूरी के भुगतान में देरी का सीधा असर उन परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है, जो रोजगार के लिए इस योजना पर निर्भर हैं।

छह जिलों में हुआ ऑडिट

कैग ने मनरेगा के क्रियान्वयन की जांच के लिए झारखंड के छह जिलों का चयन किया था। इनमें पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला और पाकुड़ शामिल हैं।

इन छह जिलों के 12 प्रखंडों और 48 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत संचालित 480 योजनाओं का भौतिक सत्यापन भी किया गया। ऑडिट में योजना के क्रियान्वयन, रोजगार उपलब्ध कराने, मजदूरी भुगतान और योजनाओं की पूर्णता जैसे पहलुओं की जांच की गई।

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रिपोर्ट में मनरेगा की योजनाओं की पूर्णता दर को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2019-24 के दौरान राज्य में मनरेगा के तहत करीब 1.02 करोड़ योजनाएं दर्ज की गईं। इनमें से केवल 27.96 लाख योजनाएं पूरी हो सकीं।

इसका मतलब है कि योजनाओं की पूर्णता दर करीब 27 प्रतिशत रही। मार्च 2024 तक मनरेगा की योजनाओं पर 2,633 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। इसके बावजूद 50.21 लाख यानी करीब 49 प्रतिशत योजनाएं अधूरी पाई गईं। वहीं, लगभग 24 प्रतिशत योजनाएं शुरू ही नहीं की गई थीं।

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