मनरेगा घोटाला: मृतकों के नाम पर उठाई गई सरकारी राशि, करोड़ों की धोखाधड़ी का खुलासा; मुखिया समेत 11 पर FIR दर्ज

News Saga Desk

रांची। मनरेगा योजनाओं में भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। सरकारी योजनाओं को निजी लूट का ज़रिया बनाकर, अल्पिटो पंचायत की मुखिया सुमिता देवी सहित 11 लोगों पर भारी वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है। विष्णुगढ़ प्रखंड विकास पदाधिकारी अखिलेश कुमार ने गंभीर अनियमितताओं, कागजी हेराफेरी और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आधार पर सभी आरोपितों के खिलाफ आपराधिक साजिश और गबन के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई है।

मनरेगा के तहत वर्ष 2022-23 में पशु/बकरी शेड निर्माण योजना और बिरसा सिंचाई कूप योजना के नाम पर करीब 22 लाख रुपये की राशि का फर्जी तरीके से उठाव किया गया।बिना ग्रामसभा की स्वीकृति, बिना कार्य आदेश और बिना मापी पुस्तिका के योजनाएं चलाई गईं। कई मामलों में मृत व्यक्तियों के नाम पर भी राशि निकाली गई। IPC 467, 468, 471, 406, 409, 419, 420, 427, 120B धारा लगाकर प्राथमिकी दर्ज की गयी जिसमें सुमिता देवी (मुखिया), धनेश्वर यादव (मुखिया पति), शिव कुमार प्रसाद (तत्कालीन पंचायत सचिव),बालेश्वर यादव, रमेश यादव, जागेश्वर यादव, भीखन रविदास, पवन कुमार यादव, बालेश्वर रविदास, सहदेव यादव, झमन कुमार महतो (सामग्री आपूर्तिकर्ता) को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। 

19 पशु शेड योजनाएं में कुल खर्च 95,928.21 रुपये दिखाया गया है जिसमें मजदूरी मद 2,94,561 रुपये और सामग्री मद 19,01,367.21 रुपये का ब्यौरा दिया गया है। बिना दस्तावेज, बिना निरीक्षण, बिना स्वीकृति  सीधे खाते में पैसा दे दिया गया जिसमें मृतकों के नाम पर भुगतान किया गया उसमें जगदीश रविदास: मृत्यु के 20 दिन बाद उनके नाम से 1,08,415.20 रुपये का भुगतान किया गया। विजय रविदास का फरवरी में निधन हुआ जबकि मई में मजदूरी का भुगतान दिखाया गया।

वहीं दूसरी ओर बिरसा सिंचाई कूप योजना के तहत, जेसीबी मशीन से अवैध खुदाई करा पूर्व-निर्मित कूप को नया बताकर भुगतान किया जिसकी राशि 88,251 रुपये की वसूली निर्धारित में 58,834 रुपये अब तक नहीं चुकाया गया। योजनाएं बिना ग्रामसभा अनुमोदन के हुआ जिसमें कार्य आदेश, मापी पुस्तिका, फोटो, बिल सब गायब मिले। वहीं मास्टर रोल पर मजदूरों के फर्जी या बिना हस्ताक्षर भुगतान किया गया, सामग्री आपूर्तिकर्ता ने कोई आपूर्ति रसीद तक नहीं दी। 

मुखिया के पति धनेश्वर यादव के भाइयों की पत्नियों के नाम पर योजनाएं दे दी जिसमें परिवार के बच्चों के नाम पर बनाए गए 14 जॉब कार्ड, जिसमें मनरेगा के “एक परिवार, एक जॉब कार्ड” नियम का खुला उल्लंघन हुआ। वसूली का आदेश हुआ फिर भी राशि जमा नहीं की गयी।  कुल वसूली योग्य राशि (ब्याज समेत) 27,87,811.68 रुपये हैं। सुमिता देवी ने 11,92,635.30 रुपये और पंचायत सचिव ने 11,02,615.50 रुपये जमा नहीं की। अभी भी 22,95,250.80 रुपये की  वसूली बकाया है। 

प्रखंड विकास पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। उच्च स्तरीय जांच के आदेश के साथ प्रशासन इस मामले को ‘हाई प्रोफाइल वित्तीय अपराध’ मानते हुए आगे की कार्रवाई कर रहा है। इस पूरे मामले में बीडीओ विष्णुगढ़ अखिलेश कुमार ने कहा “यह सुनियोजित षड्यंत्र है। जांच में दोषियों की मिलीभगत स्पष्ट रूप से सामने आई है। सरकारी राशि को गबन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”


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