नेपाल में पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्रशमशेर राणा की गिरफ्तारी पर संसद में विपक्ष ने हंगामा किया। बिना वारंट हिरासत और कानून के उल्लंघन पर सरकार से जवाब मांगा।
News Saga Desk
नेपाल में पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्रशमशेर राणा की गिरफ्तारी का मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। आधी रात को कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने को लेकर विपक्षी दलों ने संसद में सरकार के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। विपक्षी सांसदों ने राणा की गिरफ्तारी को विधि के शासन और संवैधानिक व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए सरकार से इस कार्रवाई का स्पष्ट कारण बताने की मांग की। वहीं, संसद में सत्तापक्ष के सांसदों ने इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
नेपाल में इस मामले को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। नेपाली कांग्रेस, एमाले, नेकपा, श्रम संस्कृति पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (राप्रपा) के सांसदों ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश की हिरासत पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने ‘जेन-जी’ के नाम का इस्तेमाल कर संविधान और कानून के प्रावधानों की अनदेखी की है। विपक्षी सांसदों ने यह भी सवाल किया कि यदि राणा की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता थी, तो उन्हें हिरासत में लेने के बजाय सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई।
पूर्व प्रधान न्यायाधीश की गिरफ्तारी पर संसद में विरोध
चोलेन्द्रशमशेर राणा को आधी रात को हिरासत में लिए जाने की घटना ने नेपाल की संसद में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्षी सांसदों ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी पूर्व प्रधान न्यायाधीश को हिरासत में लेने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप होनी चाहिए।
विपक्ष का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से देश की संवैधानिक व्यवस्था और न्यायिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर सवाल खड़े होते हैं। सांसदों ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि राणा को किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया था और इस कार्रवाई के लिए कौन-सा कानूनी आधार अपनाया गया।
विपक्षी दलों ने राणा को हिरासत में लेने के बाद रिहा किए जाने के कारणों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकार को गिरफ्तारी और रिहाई, दोनों के संबंध में स्पष्ट जानकारी संसद के सामने रखनी चाहिए।
आनन्द प्रसाद ढुंगाना ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल
नेपाली कांग्रेस के सांसद आनन्द प्रसाद ढुंगाना ने संसद में सरकार की कार्यशैली की आलोचना करते हुए मौजूदा शासन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया निरंकुशता की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। ढुंगाना ने यहां तक कहा कि वर्तमान शासन शैली पंचायती व्यवस्था के दौर से भी अधिक निरंकुश नजर आ रही है।
उन्होंने सवाल किया कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश को रात के समय उनके घर से बिना वारंट क्यों पकड़ा गया। उनके मुताबिक, इस तरह की कार्रवाई के पीछे सरकार को स्पष्ट कानूनी कारण बताना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर नेपाल में किस तरह की शासन व्यवस्था चल रही है, जहां कानून के बजाय मौखिक आदेशों के आधार पर कार्रवाई किए जाने के आरोप लग रहे हैं।

ढुंगाना ने सरकार से जवाब मांगा कि राणा को हिरासत में लेने का वास्तविक कारण क्या था और क्या इस कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था।
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‘जेन-जी’ के नाम पर कार्रवाई का आरोप
विपक्षी सांसदों ने राणा की गिरफ्तारी के मामले में ‘जेन-जी’ का नाम लिए जाने पर भी आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि इस नाम का इस्तेमाल करके संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी की जा रही है।
ढुंगाना ने अपने संबोधन में पहले हुई हिंसक घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इससे पहले ‘जेन-जी’ के नाम पर सिंहदरबार, सर्वोच्च अदालत, संसद और राष्ट्रपति भवन में आगजनी की घटनाएं हुई थीं। अब इसी नाम का हवाला देकर पूर्व प्रधान न्यायाधीश की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया।
विपक्ष का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा से संबंधित चिंताओं का समाधान कानून के दायरे में रहकर किया जाना चाहिए। सांसदों ने इस मामले में सरकार की ओर से दिए गए तर्कों पर भी असहमति जताई है।
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