दक्षिण 24 परगना के पाथरप्रतिमा में कालू नदी पर बना पुल ढह गया। ग्रामीणों ने निर्माण में अनियमितता के आरोप लगाकर जांच और नए पुल की मांग की।
News Saga Desk
दक्षिण 24 परगना: पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के पाथरप्रतिमा ब्लॉक में रविवार तड़के कालू नदी पर बना महत्वपूर्ण कंक्रीट का पुल अचानक ढह गया। यह पुल दक्षिण गंगाधरपुर ग्राम पंचायत के आबाद गंगाधरपुर गांव को श्रीनारायणपुर-पुर्णचंद्रपुर ग्राम पंचायत क्षेत्र से जोड़ता था। पुल के टूटने के बाद इलाके में आवागमन प्रभावित हो गया है और स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
करीब 32 लाख रुपये की लागत से बना था पुल
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस पुल का निर्माण करीब पांच वर्ष पहले लगभग 32 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय से ही पुल की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे थे। लोगों ने निर्माण में कथित तौर पर निम्न गुणवत्ता की सामग्री इस्तेमाल किए जाने की शिकायत की थी।
ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निर्माण के बाद पुल में दरारें दिखाई देने लगी थीं। इसके बाद कुछ पतले लोहे के सरियों का इस्तेमाल कर दोबारा ढलाई किए जाने की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।
पुल टूटने के बाद सड़क पर उतरे ग्रामीण
पुल के अचानक ढहने की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए निर्माण कार्य की जांच कराने और कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण के दौरान गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाने पर उन्हें कथित तौर पर डराया-धमकाया गया था। ग्रामीणों ने मारपीट और पुलिस में शिकायत करने की धमकी दिए जाने के भी आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्कूल, अस्पताल और बीडीओ कार्यालय तक पहुंच प्रभावित
यह पुल स्थानीय लोगों के लिए केवल आवागमन का रास्ता नहीं था, बल्कि आसपास के कई महत्वपूर्ण इलाकों को जोड़ने वाली प्रमुख कड़ी था। स्कूल और कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के अलावा ग्रामीण गदामथुरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और रामगंगा बीडीओ कार्यालय समेत कई जरूरी स्थानों तक पहुंचने के लिए इस पुल का इस्तेमाल करते थे।
पुल टूटने के बाद सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, विद्यार्थियों और आपातकालीन स्थिति में आने-जाने वाले लोगों को हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि संपर्क मार्ग बाधित होने से रोजमर्रा की जिंदगी भी प्रभावित हुई है।
केले के तनों से बनी मान्दास बनी सहारा
पुल के टूट जाने के बाद कालू नदी को पार करने के लिए ग्रामीणों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। फिलहाल नदी पार करने के लिए केले के तनों से बनी स्थानीय नावनुमा मान्दास का सहारा लिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह व्यवस्था सुरक्षित और स्थायी विकल्प नहीं है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और महिलाओं के लिए नदी पार करना जोखिम भरा हो सकता है। लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की है।
मंत्री ने दिया जल्द कार्रवाई का भरोसा
घटना की जानकारी मिलने के बाद सुंदरबन विकास राज्य मंत्री दीपांकर जान ने मौके की स्थिति को लेकर लोगों को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि जल्द ही पुल की मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण का काम शुरू कराने की कोशिश की जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि पिछले निर्माण कार्य में यदि भ्रष्टाचार या किसी तरह की अनियमितता की शिकायत जांच में सही पाई जाती है, तो मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल ग्रामीणों की मांग है कि पुल के ढहने की तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई जाए तथा जल्द से जल्द नया पुल बनाया जाए, ताकि आबाद गंगाधरपुर और आसपास के इलाकों का संपर्क सामान्य हो सके।
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