राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने युवा दिनों की घटना सुनाते हुए बताया कि कैसे सिक्किम में एक खुफिया मिशन के दौरान उनके एजेंट चीन के चंगुल में फंस गए थे और उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो जाएगा।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए अपने शुरुआती करियर का एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसने सभी को हैरान कर दिया। जब वह 20 वर्ष के एक युवा आईपीएस (IPS) अधिकारी थे और सिक्किम में तैनात थे, तब एक ऐसी घटना घटी जिसने उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया था कि उनका सरकारी करियर अब खत्म हो चुका है।

सिक्किम के विलय से पहले की है यह घटना
डोभाल ने बताया कि यह कहानी उस दौर की है जब सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य नहीं बना था। (उल्लेखनीय है कि मई 1975 में संविधान के 36वें संशोधन के माध्यम से सिक्किम को भारत का 22वां राज्य बनाया गया था)।
उस समय युवा आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल को सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की गतिविधियों और रणनीतिक गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने और खुफिया जानकारी जुटाने का महत्वपूर्ण कार्य सौंपा गया था।
15 दिनों तक गायब रही खुफिया टीम
डोभाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एक बार उन्होंने एक भारतीय खुफिया टीम को सीमा क्षेत्र में एक विशेष मिशन पर भेजा था। तय योजना के मुताबिक इस टीम को कुछ ही दिनों में वापस लौट आना था। लेकिन 8 दिन बीत जाने के बाद भी टीम वापस नहीं आई। जब 10 और फिर 15 दिन बीत गए, तो चिंता काफी बढ़ गई। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना की कोई रिपोर्ट नहीं थी, जिससे रहस्य और गहरा गया था।
मुख्यालय से आया फोन और उड़े होश
कुछ दिनों बाद डोभाल को सीधे मुख्यालय से एक वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया। अधिकारी ने उनसे पूछा, “क्या आपने कुछ लोगों को सीमा पार किसी मिशन पर भेजा था?”
जब डोभाल ने ‘हाँ’ में जवाब दिया, तो अधिकारी ने उन्हें जो सूचना दी उससे उनके होश उड़ गए। अधिकारी ने बताया कि वह पूरी खुफिया टीम इस वक्त चीन की हिरासत में है। इस खबर को सुनते ही डोभाल काफी परेशान हो गए। उस समय उन्हें पूरा यकीन हो गया था कि इस गंभीर लापरवाही के कारण उनका करियर हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा और उन्हें किसी दूसरे पेशे की तलाश करनी पड़ेगी। हालांकि, बाद में हुई उच्चस्तरीय जांच में यह साफ हो गया कि इस घटना में अजीत डोभाल की कोई व्यक्तिगत गलती नहीं थी। जांच में पाया गया कि मुख्यालय से टीम को उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में कुछ गंभीर त्रुटियां और कमियां थीं, जिसके कारण टीम अनजाने में सीमा पार कर चीनी क्षेत्र में चली गई थी।
चीनी अधिकारियों द्वारा पूछताछ करने के कुछ समय बाद भारतीय एजेंटों को सुरक्षित वापस लौटा दिया गया। जांच में क्लीन चिट मिलने के बाद डोभाल पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई और उनका करियर सुरक्षित रहा।
No Comment! Be the first one.