बिहार की राजधानी पटना में परीक्षा परिणाम और सरकारी नीतियों को लेकर छात्रों व किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। गांधी मैदान से डाकबंगला चौराहा तक पुलिस के साथ तीखी झड़प और लाठीचार्ज।
बिहार की राजधानी पटना सोमवार को दो बड़े और उग्र प्रदर्शनों का केंद्र बनी रही। एक ओर जहां स्वास्थ्य शिक्षा से जुड़े छात्र परीक्षा परिणामों को लेकर सड़कों पर आक्रामक नजर आए, वहीं दूसरी ओर वामपंथी संगठनों, किसानों और मजदूरों ने सरकारी नीतियों तथा आपदा प्रबंधन के खिलाफ गांधी मैदान से ‘आक्रोश मार्च’ निकाला। दोनों ही आंदोलनों से दोपहर होते-होते पटना के मध्य इलाकों में भारी हलचल मच गई और डाकबंगला चौराहे से लेकर जेपी गोलंबर तक सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के छात्रों का गुस्सा
प्रदर्शन का एक प्रमुख मोर्चा ‘बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज’ के छात्रों ने संभाला। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद छात्रों में गहरा असंतोष है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का गंभीर आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने लापरवाही बरतते हुए लगभग 95 प्रतिशत परीक्षार्थियों को अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित कर दिया है। छात्रों का कहना है कि इस परिणाम से उनके भविष्य और करियर पर गहरा संकट मंडरा रहा है।

छात्रों ने मांग की है कि सभी उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और परिणाम में हुई गड़बड़ियों का तत्काल समाधान निकाला जाए। हालांकि, 95 प्रतिशत छात्रों के फेल होने का दावा प्रदर्शनकारियों का अपना आरोप है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। इस छात्र आंदोलन को समर्थन देने के लिए सांसद पप्पू यादव के भी मौके पर पहुंचने की खबरें सामने आईं। दूसरी तरफ, राज्य में बाढ़-सूखे की मार झेल रहे किसानों और मजदूरों के समर्थन में वामपंथी संगठनों ने मोर्चा खोला। AISF, CPI, AIKF तथा अन्य वाम दलों के कार्यकर्ताओं ने गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से डाकबंगला चौराहे की तरफ आक्रोश मार्च की शुरुआत की।
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प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर “वित्त रहित शिक्षा का कलंक समाप्त करो”, “बाढ़-सूखा का स्थाई निदान करो” और “बाढ़ पीड़ितों को युद्धस्तर पर राहत उपलब्ध कराओ” जैसे सख्त नारे लिखे हुए थे। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में रोजगार सृजन, स्कीम वर्कर्स का स्थायीकरण, न्यूनतम मानदेय का निर्धारण तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी शामिल रही।
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