प्रेम कीटाणु फिल्म रिव्यू: कमजोर कहानी, फीकी कॉमेडी

प्रेम कीटाणु फिल्म रिव्यू में जानिए वीर पहाड़िया, आफिया सैयद और अपारशक्ति खुराना की अदाकारी, कमजोर कहानी, फीकी कॉमेडी और फिल्म की खूबियों व खामियों के बारे में।

News Saga Desk

प्रेम कीटाणु फिल्म रिव्यू: प्यार, दोस्ती, कॉमेडी और पारिवारिक रिश्तों को एक साथ पर्दे पर उतारने की कोशिश करती फिल्म ‘प्रेम कीटाणु’ दर्शकों को हल्का-फुल्का मनोरंजन देने के इरादे से बनाई गई है। वीर पहाड़िया, आफिया सैयद और अपारशक्ति खुराना जैसे कलाकारों से सजी इस फिल्म का निर्देशन अपूर्व सिंह कार्की ने किया है। फिल्म के पास एक मनोरंजक रोमांटिक कॉमेडी बनने का मौका था, लेकिन कमजोर लेखन, बिखरी कहानी और फीकी कॉमेडी के कारण यह उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती। कुछ हल्के-फुल्के पल जरूर हैं, लेकिन फिल्म दर्शकों को लंबे समय तक बांधे रखने में कामयाब नहीं होती।

फिल्म की जानकारी

फिल्म

प्रेम कीटाणु

निर्देशक

अपूर्व सिंह कार्की

मुख्य कलाकार

वीर पहाड़िया, आफिया सैयद, अपारशक्ति खुराना

जॉनर

रोमांस, कॉमेडी, पारिवारिक ड्रामा

अवधि

2 घंटे 18 मिनट

रेटिंग

★½ (1.5/5)

कैसी है प्रेम कीटाणु की कहानी

फिल्म की कहानी विशाल की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी मुलाकात सुहानी से होती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती हैं और विशाल इस रिश्ते को लेकर गंभीर हो जाता है। हालांकि, सुहानी की अपनी उम्मीदें और सोच हैं, जो दोनों के रिश्ते में उलझन पैदा करती हैं। इसी बीच रंजीत की एंट्री होती है, जिससे कहानी में प्रेम त्रिकोण का नया मोड़ आता है।

इसके बाद फिल्म प्यार के साथ दोस्ती और पारिवारिक रिश्तों को भी जोड़ने की कोशिश करती है। हालांकि, कहानी कई जगह स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ने के बजाय जबरदस्ती घटनाओं को जोड़ती हुई महसूस होती है। किरदारों के फैसलों के पीछे पर्याप्त भावनात्मक आधार नहीं दिखाई देता। यही वजह है कि दर्शक कहानी के साथ गहराई से जुड़ नहीं पाते।

निर्देशन और लेखन में रह गई कमी

निर्देशक अपूर्व सिंह कार्की ने फिल्म का माहौल हल्का-फुल्का बनाए रखने की कोशिश की है। हालांकि, कमजोर पटकथा के कारण उनका प्रयास पूरी तरह सफल नहीं हो पाता। रोमांस, कॉमेडी और पारिवारिक ड्रामा के बीच संतुलन बनाने में फिल्म कई जगह कमजोर पड़ती है।

प्रेम कीटाणु

कहानी में ऐसे कई मौके आते हैं, जहां किरदारों की भावनाओं को विस्तार देकर बेहतर तरीके से दिखाया जा सकता था। इसके बजाय घटनाएं तेजी से आगे बढ़ती हैं और कई महत्वपूर्ण पहलुओं को सतही तौर पर छोड़ दिया जाता है।

कॉमेडी के दृश्यों में भी निरंतरता की कमी दिखाई देती है। कुछ संवाद और दृश्य हल्की मुस्कान जरूर लाते हैं, लेकिन वे जोरदार हंसी पैदा नहीं कर पाते। रोमांटिक दृश्यों में भी वह भावनात्मक गहराई नजर नहीं आती, जिसकी इस तरह की फिल्म से उम्मीद की जाती है।

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वीर पहाड़िया और आफिया सैयद की अदाकारी

अभिनय की बात करें तो वीर पहाड़िया ने विशाल के किरदार को सहजता से निभाने की कोशिश की है। उनके अभिनय में किरदार की मासूमियत और उलझन दिखाई देती है, लेकिन कमजोर किरदार लेखन के कारण उनका प्रदर्शन ज्यादा प्रभावशाली नहीं बन पाता।

आफिया सैयद अपनी पहली फिल्म में आत्मविश्वास के साथ नजर आती हैं। हालांकि, उनके किरदार को भी पर्याप्त गहराई नहीं दी गई है। वीर पहाड़िया के साथ उनकी केमिस्ट्री कुछ दृश्यों में ठीक लगती है, लेकिन पूरी फिल्म को प्रभावशाली बनाने के लिए यह पर्याप्त साबित नहीं होती।

अपारशक्ति खुराना से दर्शकों को कॉमेडी के मोर्चे पर काफी उम्मीदें रहती हैं। रंजीत के किरदार में वह अपनी ओर से प्रयास करते हैं, लेकिन कमजोर संवाद और सीमित पटकथा के कारण उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के ज्यादा मौके नहीं मिलते। राकेश बेदी और अन्य कलाकार भी अपने किरदारों को निभाने की कोशिश करते हैं, लेकिन कहानी की कमजोरियां उनके अभिनय पर भारी पड़ती हैं।

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