SIR Teacher Duty Controversy को लेकर झारखंड में विवाद बढ़ गया है। शिक्षक संघ ने कहा कि 25 हजार शिक्षकों की चुनावी ड्यूटी से सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होगी।
SIR Teacher Duty Controversy को लेकर झारखंड में बहस तेज हो गई है। 30 जून से शुरू होने वाले विशेष मतदाता पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति का झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ ने विरोध किया है। संघ का कहना है कि पहले से शिक्षक संकट झेल रहे सरकारी स्कूलों में इस फैसले से छात्रों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित होंगी।
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि चुनावी और प्रशासनिक कार्यों में लगातार शिक्षकों की ड्यूटी लगाने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लक्ष्य प्रभावित हो रहा है।
क्या है SIR अभियान?
SIR Teacher Duty Controversy की वजह चुनाव आयोग का विशेष मतदाता पुनरीक्षण अभियान है। इसके तहत बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। इस कार्य के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की सेवाएं ली जा रही हैं।
जानकारी के अनुसार राज्य में लगभग 24,520 मतदान केंद्र हैं। करीब 50 हजार बीएलओ में पहले से लगभग 7,500 शिक्षक कार्यरत हैं। अभियान को सफल बनाने के लिए 25 हजार से अधिक शिक्षकों की अतिरिक्त ड्यूटी भी लगाई जा सकती है।

शिक्षक संघ ने क्या कहा?
झारखंड माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव गंगा प्रसाद यादव ने कहा कि शिक्षकों का मूल कार्य विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। लेकिन चुनाव, जनगणना, मतदाता पुनरीक्षण और अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों में लगातार ड्यूटी लगाए जाने से नियमित पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य में पहले ही शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को चुनावी कार्यों में लगाने से 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों की पढ़ाई पर सबसे अधिक असर पड़ेगा।
शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
जिला सचिव संजय यादव ने कहा कि जनगणना का कार्य पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुआ है और अब एसआईआर अभियान की जिम्मेदारी भी शिक्षकों को दी जा रही है। इससे नियमित कक्षाएं बाधित होंगी और छात्रों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
संघ का कहना है कि परीक्षा परिणाम खराब होने पर शिक्षा विभाग शिक्षकों से जवाब मांगता है, जबकि उनका काफी समय गैर शैक्षणिक कार्यों में चला जाता है।
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SIR अभियान का पूरा शेड्यूल
- 30 जून: घर-घर मतदाता सत्यापन शुरू
- 1 अगस्त: प्रारूप मतदाता सूची का प्रकाशन
- 4 अगस्त से 1 सितंबर: दावा एवं आपत्ति दर्ज
- 7 अक्टूबर: अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित
अब देखना होगा कि शिक्षक संगठनों की आपत्तियों के बाद सरकार अपने फैसले में कोई बदलाव करती है या नहीं। फिलहाल SIR Teacher Duty Controversy शिक्षा और चुनावी व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर नई बहस का विषय बन गई है।
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