सीतापुर में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा पर विवाद

NEWS SAGA DESK

सीतापुर में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा में बारिश के बाद दरार और रंग उखड़ने से गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। विधायक ने जांच के निर्देश दिए हैं।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर नगर पंचायत में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बारिश के बाद प्रतिमा पर दरारें दिखाई देने और बाहरी रंग उखड़ने के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। मामले में अब उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। करीब 6.99 लाख रुपये की लागत से तैयार कराई गई इस प्रतिमा को लेकर जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा

बारिश ने खोली प्रतिमा की गुणवत्ता की पोल

सीतापुर नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक-10 स्थित आहारा तालाब के अटल परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा स्थापित की गई थी। यह प्रतिमा 25 दिसंबर 2025 को अटल जयंती के अवसर पर स्थापित की गई थी।

स्थापना के करीब छह महीने बाद बारिश के दौरान प्रतिमा की बाहरी सतह पर दरारें दिखाई देने लगीं। इसके अलावा कई हिस्सों से पेंट और ऊपरी परत उखड़ने लगी। स्थानीय लोगों का दावा है कि प्रतिमा के क्षतिग्रस्त हिस्से से भीतर सीमेंट जैसी सामग्री दिखाई दे रही है। इसी के बाद प्रतिमा निर्माण में इस्तेमाल सामग्री और इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

6.99 लाख रुपये के काम पर उठे सवाल

जानकारी के मुताबिक, प्रतिमा निर्माण का काम करीब 6.99 लाख रुपये में ठेके पर दिया गया था। प्रतिमा की मौजूदा स्थिति सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर काम की लागत और निर्माण में इस्तेमाल सामग्री को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। यही वजह है कि मामले में तकनीकी और वित्तीय दोनों पहलुओं की जांच की मांग की जा रही है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि टेंडर में प्रतिमा के निर्माण के लिए किस प्रकार की सामग्री और गुणवत्ता निर्धारित की गई थी और मौके पर वास्तव में उसका कितना पालन हुआ।

विधायक रामकुमार टोप्पो ने दिए जांच के निर्देश

प्रतिमा की स्थिति सामने आने के बाद सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। विधायक की ओर से गुणवत्ता संबंधी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने को कहा गया है।

जांच के दौरान प्रतिमा के निर्माण, इस्तेमाल की गई सामग्री, ठेके की शर्तों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ था या नहीं।

भुगतान रोका गया, सीएमओ ने बताई वजह

सीतापुर नगर पंचायत के सीएमओ ओमप्रकाश शर्मा के अनुसार, प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर पहले से ही संशय था। इसी कारण संबंधित ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया है।

अधिकारियों के मुताबिक, जांच रिपोर्ट सामने आने और उच्चाधिकारियों से आवश्यक निर्देश प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता या निर्धारित मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

धातु की प्रतिमा या मिश्रित सामग्री? जांच से खुलेगा राज

मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रतिमा में इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर है। स्थानीय स्तर पर इसे धातु से निर्मित प्रतिमा बताया गया है, जबकि क्षतिग्रस्त हिस्सों में सीमेंट जैसी सामग्री दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रतिमा पूरी तरह कांस्य या निर्धारित गुणवत्ता वाली धातु से बनी है तो सामान्य परिस्थितियों में बारिश के कुछ महीनों के भीतर इस तरह दरारें और सतही क्षति चिंता का विषय हो सकती है। हालांकि, प्रतिमा की वास्तविक संरचना और सामग्री की पुष्टि केवल तकनीकी जांच या विशेषज्ञ परीक्षण से ही हो सकती है।

इसलिए अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा के मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सामग्री की वैज्ञानिक जांच और निर्माण संबंधी दस्तावेजों का मिलान जरूरी माना जा रहा है।

कटघोरा और मरवाही के मामलों से जुड़ रहे तार

प्रतिमा को लेकर उठा विवाद अकेला मामला नहीं बताया जा रहा है। इससे पहले छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कटघोरा और मरवाही में भी अटल परिसर में स्थापित प्रतिमाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ चुके हैं।

इन घटनाओं के सामने आने के बाद अब पूरे प्रदेश में नगरीय निकायों के माध्यम से स्थापित अटल प्रतिमाओं की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है। यदि अलग-अलग स्थानों पर एक जैसी शिकायतें सामने आती हैं तो निर्माण प्रक्रिया, टेंडर व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण की व्यापक समीक्षा की जरूरत पड़ सकती है।

प्रदेशभर की प्रतिमाओं की जांच की मांग

अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति को स्थायी रूप से सम्मान देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में अटल परिसर विकसित करने की योजना शुरू की थी। ऐसे में इन परिसरों में स्थापित प्रतिमाओं की गुणवत्ता को लेकर उठने वाले सवाल सरकार और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि सभी अटल परिसरों में स्थापित प्रतिमाओं का तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। जिला कलेक्टरों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों के स्तर पर भी प्रतिमाओं की स्थिति की बारीकी से जांच करने की बात सामने आई है।


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जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर

सीतापुर में अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से जुड़ा विवाद फिलहाल जांच के दायरे में है। ठेकेदार का भुगतान रोके जाने और विधायक की ओर से जांच के निर्देश दिए जाने के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

जांच से ही स्पष्ट होगा कि प्रतिमा में आई दरार और पेंट उखड़ने की वजह निर्माण सामग्री और तकनीकी खामी है, मौसम का प्रभाव है या निर्माण कार्य में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है। यदि गुणवत्ता मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जा सकती है।

मामले की निष्पक्ष जांच न केवल सीतापुर की प्रतिमा की वास्तविक स्थिति सामने लाएगी, बल्कि प्रदेश के अन्य अटल परिसरों में स्थापित प्रतिमाओं की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देने में भी मदद कर सकती है।

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