विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत शुरू, आवागमन बंद; 161 किमी का नया रूट

NEWS SAGA DESK

भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य के कारण 30 सितंबर से यातायात पूरी तरह बंद कर दिया गया है। गूगल मैप अब नवगछिया जाने के लिए सुल्तानगंज-मुंगेर-खगड़िया होकर 161 किमी का वैकल्पिक मार्ग दिखा रहा है।

बिहार के भागलपुर और नवगछिया को जोड़ने वाले अतिमहत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु (Vikramshila Setu) पर पुनर्स्थापन और मरम्मत का काम आधिकारिक तौर पर शुरू हो गया है। इसके चलते सेतु पर सभी प्रकार के छोटे और बड़े वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। 30 सितंबर 2026 की आधी रात से सेतु पर लगे अस्थायी बेली ब्रिज को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सेतु बंद होते ही नेविगेशन ऐप गूगल मैप (Google Maps) ने भी इस मुख्य रास्ते को ब्लॉक (Deactivate) कर दिया है।

बिहार के भागलपुर और नवगछिया

विक्रमशिला सेतु बंद होने के कारण अब जीरोमाइल से नवगछिया की ओर जाने वाले वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गूगल मैप अब यात्रियों को बेहद लंबा वैकल्पिक मार्ग सुझा रहा है, जिससे सफर का समय और दूरी दोनों काफी बढ़ गए हैं।

20 किमी की दूरी के लिए तय करना होगा 161 किमी का सफर

सामान्य दिनों में भागलपुर के जीरोमाइल से नवगछिया की दूरी विक्रमशिला सेतु के रास्ते महज 20 किलोमीटर थी, जिसे तय करने में 20 से 30 मिनट का समय लगता था। लेकिन अब सेतु बंद होने के बाद गूगल मैप वाहन चालकों को लगभग 161 किलोमीटर का वैकल्पिक रूट दिखा रहा है। यानी अब यात्रियों को नवगछिया पहुंचने के लिए करीब 141 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ेगा।

यह होगा नया और वैकल्पिक रूट: गूगल मैप और स्थानीय प्रशासन की सलाह के अनुसार, छोटे और बड़े वाहनों को अब जीरोमाइल से सुल्तानगंज, मुंगेर (श्रीकृष्ण सेतु), खगड़िया, नारायणपुर और बिहपुर होते हुए नवगछिया पहुंचना होगा।

लगभग तीन महीने तक बंद रहेगा सेतु

भागलपुर जिला प्रशासन और निर्माण एजेंसी की योजना के मुताबिक, विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन का काम लगभग तीन महीने तक चलने की संभावना है।

  • पहला चरण: 30 सितंबर की रात से बेली ब्रिज को सुरक्षित तरीके से हटाने का काम शुरू किया गया है।
  • दूसरा चरण: बेली ब्रिज हटने के बाद सेतु के क्षतिग्रस्त स्पैन और मुख्य संरचना के पुनर्स्थापन का पक्का काम किया जाएगा।
  • यातायात बहाली: पूरी तरह से मरम्मत का काम संपन्न होने और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद ही सेतु पर दोबारा गाड़ियों का परिचालन शुरू किया जाएगा।

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